झांसी। सिद्धार्थ हत्याकांड की उलझी गुत्थी सुलझाने में जुटी पुलिस को 24 घंटे बाद भी कोई ओर-छोर नहीं दिखा है। कई प्रश्न सामने खड़े हैं, जिनका जवाब मिलने पर ही खुलासा संभव है। इस वजह से पुलिस ने पड़ताल तेज कर दी है।
रविवार की दोपहर पीडब्ल्यूडी आफीसर्स कॉलोनी के पास चतुर्थ श्रेणी कर्मी परशुराम के पुत्र सिद्धार्थ की घर के अंदर पलंग पर खून से लथपथ लाश मिली थी। उसके सीने पर गोली मारकर हत्या की गई थी।
मौके से पुलिस को फटी फोटो मिली थी। बरामद हिस्से में मृतक का फोटो था, जबकि शेष हिस्सा गायब था। सिद्धार्थ की शर्ट खुली हुई थी और बटन टूटे थे। इससे हमलावरों से संघर्ष का संकेत साफ था। मगर कमरे के हालात व पलंग की चादर इसकी पुष्टि नहीं कर रहे थे। नजदीक में रहने वाली एक महिला ने बताया कि वह घर के बाहर बैठी थी, तभी घर से तेज धमाके के साथ सिद्धार्थ की चीख सुनाई दी थी, मगर घर से निकलते किसी को नहीं देखा। वहीं, सिद्धार्थ के घर पहुंचे दो किशोर दोस्तों ने बताया कि वह सिद्धार्थ द्वारा खरीदे गए मोबाइल के 2500 रुपये लेने गए थे। अंदर तेज आवाज में टीवी चल रहा था।
काफी आवाज देने पर जब कोई जवाब नहीं मिला तो पड़ोस की आंटी ने घर से तेज धमाके की आवाज आने की बात कही, जिस पर वह चले गए। सिद्धार्थ के मोबाइल फोन पर जो लास्ट काल आई थी, वह उसके दोस्त की थी। उसने गोली लगने की सूचना मिलने पर पूछताछ के लिए मिलाया था। बेसुराग पुलिस ने जब आत्महत्या के बिंदुओं की पड़ताल शुरू की तो मामला फंसता मिला। अब सवाल यह है कि यदि सिद्धार्थ ने आत्महत्या की, तो फिर फटी आधी फोटो कहां है? उसे कौन उठाकर ले गया? वह तमंचा कहा हैं, जिससे गोली चली।
इंसेट
परशुराम के घर के मुख्य दरवाजे के अंदर लगी कुंडी खराब होने की वजह से सिद्धार्थ की मौत का रहस्य गहरा गया है। इसकी वजह यह है कि दरवाजा बंद होते ही अंदर की कुंडी गिर जाती है, जिससे कमरा बंद हो जाता है। बाहर से यदि किसी को दरवाजा खोलना होता है, तो उसे कोई पतली डंडीनुमा चीज डालनी पड़ती है।