चिरगांव। बुंदेलखंड पैकेज के तहत बनाई गई मुड़ेई मंडी का संचालन एक दशक बाद भी शुरू नहीं हो सका है। किसानों की सुविधा के लिए चिरगांव ब्लाॅक के तीन गांवों में करोड़ाें रुपये की लागत से 12 वर्ष पूर्व ग्रामीण अवस्थापना केंद्र का निर्माण कराया गया था। इसमें दो गांवों में तो सरकारी क्रय केंद्र खोल दिए गए हैं। लेकिन तीसरी जगह ग्राम मुड़ेई में बनी मंडी अब तक खाली पड़ी है। देखरेख के अभाव में यहां का भवन खंडहर में तब्दील होता जा रहा है।
वर्ष 2012-13 में चिरगांव ब्लाॅक के ग्राम मुड़ेई, सेमरी, बघैरा में ग्रामीण अवस्थापना केंद्र की स्थापना की गई थी। इनमें सी श्रेणी की चार दुकानें, छायादार नीलामी चबूतरा, कार्यालय, चौकीदार भवन, शौचालय के साथ ही परिसर के चारों ओर सड़क तथा चहारदीवारी का निर्माण कराया गया था ।
एक करोड़ चौरासी लाख तीस हजार की लागत से बनी मुड़ेई गल्ला मंडी की चारों दुकानों की नीलामी हो चुकी है। लेकिन अब तक किसी भी व्यक्ति ने दुकान नहीं खोली है। दुकानें न खुलने से मंडी का भवन जर्जर अवस्था में पहुंच गया है। हालत यह है कि मंडी परिसर में बने दो गेटों में से एक गेट के बाहर उपले रखे हैं। अंदर गाय-भैंसें बंधी हैं। कृषि यंत्र रखे हैं। जगह-जगह घास फूस खड़ी है। भवन में दरारें आ गई हैं।
खास बात यह है कि मुड़ेई के आसपास का पूरा सिंचित एरिया है। यहां पर धान मूंगफली, गेहूं की अच्छी फसलें होती हैं। इसके साथ ही मंडी के आसपास बसे एक दर्जन गांवों के किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए दस किलोमीटर दूर चिरगांव मंडी में आना पड़ता है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश की सीमा लगी होने के कारण यहां के किसान भी चिरगांव मंडी में आते हैं।
वर्जन
मुड़ेई मंडी में बनी दुकानें आवंटित हैं, लेकिन कोई ग्रामीण व्यापारी लाइसेंस लेने नहीं आ रहा है। पहले व्यापारी कहते थे कि सड़क खराब है। गांव के बाहर नाला बना है, इसलिए वाहनों के निकलने में परेशानी होगी। लेकिन अब सड़क भी बन चुकी है, नाले के ऊपर पुल भी बन गया है। इसके बाद भी किसी ने लाइसेंस नहीं मांगा है। मंडी की सुरक्षा के लिए गार्ड की तैनाती की गई है।
-देवेंद्र शर्मा, मंडी सचिव, चिरगांव