सबसे पहले 1962 में चुनाव जीतीं सुशीला नैय्यर बनी थीं केंद्रीय मंत्री
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। झांसी से अब तक 17 बार चुने गए नेताओं को लोकसभा में बैठने का अवसर मिल चुका है। मगर केंद्र सरकार में प्रतिनिधित्व कम मिल पाया है। सिर्फ तीन सांसद ही एक-एक बार केंद्र में मंत्री बन सके हैं। इसमें दो बार महिला सांसदों को मंत्री बनने का मौका मिला है।
झांसी संसदीय क्षेत्र में पहला लोकसभा चुनाव 1952 में हुआ था। प्रथम सांसद चुने गए रघुनाथ विनायक धुलेकर मंत्री नहीं बन पाए थे। 1957 में सुशीला नैय्यर चुनाव जीतीं मगर उन्हें भी मंत्री नहीं बनाया गया। मगर तीसरे चुनाव में केंद्रीय मंत्रिमंडल में झांसी का सूखा खत्म हो गया। 1962 में लगातार दूसरी बार सांसद चुनी गईं सुशीला नैय्यर को स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया। इसके बाद 1967 से लेकर 2004 तक 11 बार लोकसभा चुनाव हुआ, मगर कोई सांसद केंद्र में मंत्री नहीं बन पाया। फिर 2009 में लोकसभा चुनाव जीतने वाले प्रदीप जैन आदित्य को यूपीए सरकार में ग्रामीण विकास राज्यमंत्री बनने का मौका मिला। ऐसे में करीब 42 साल बाद झांसी से कोई सांसद दूसरी बार मंत्री बन सका। हालांकि, 2014 में झांसी से भाजपा की दिग्गज नेता उमा भारती चुनाव जीतीं। उन्हें भी केंद्र सरकार में जल संसाधन, नदी विकास और गंगा सफाई मंत्री बनाया गया। ऐसे में अब तक तीन ही सांसद केंद्र सरकार में मंत्री बन पाए हैं।
नैय्यर ने कराई मेडिकल कॉलेज की स्थापना, उमा हर घर नल से जल योजना की सूत्रधार
झांसी की पहली केंद्रीय मंत्री रहीं सुशीला नैय्यर के प्रयासों से ही मेडिकल कॉलेज की स्थापना हो पाई थी। अब इस कॉलेज में पूरे बुंदेलखंड के मरीज इलाज कराने आते हैं। नैय्यर के पीआरओ रह चुके राजेंद्र रेजा ने बताया कि पहले झांसी से बरुआसागर नाव से जाना पड़ता। नैय्यर को जब ये समस्या पता चली तो उन्होंने नोटघाट पर पुल बनवाया। वहीं, बबीना विधायक राजीव सिंह पारीछा ने बताया कि उमा भारती ने बतौर मंत्री केन-बेतवा लिंक परियोजना की कई अड़चनें दूर कराईं। हर घर नल से जल योजना की भी वो सूत्रधार हैं। झांसी से ही इस योजना की शुरुआत हुई। पीएम ने 2019 में इसकी घोषणा की। झांसी को स्मार्ट सिटी में शामिल कराने के लिए भी काफी प्रयास किया। वहीं, प्रदीप जैन आदित्य ने मंत्री रहने के दौरान केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना और बुंदेलखंड पैकेज के लिए पहल की।
कब-कौन चुना गया सांसद
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वर्ष सांसद
1952 रघुनाथ विनायक धुलेकर
1957, 1962 और 1967 सुशीला नैय्यर
1971 गोविंद दास रिछारिया
1977 सुशीला नैय्यर
1980 विश्वनाथ शर्मा
1984 सुजान सिंह बुंदेला
1989, 1991, 1996, 1998 राजेंद्र अग्निहोत्री
1999 सुजान सिंह बुंदेला
2004 चंद्रपाल सिंह यादव
2009 प्रदीप जैन आदित्य
2014 उमा भारती
2019 अनुराग शर्मा