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Jhansi: मातृ दिवस पर विशेष, खेल से चिकित्सा तक...एक ही क्षेत्र में चमक रहीं दो पीढ़ियां

Sun, 10 May 2026 01:06 PM IST
दीपक महाजन संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी

सार

झांसी में एक बेटी अपनी मां की तरह ही डॉक्टर बनकर समाज की सेवा कर रही हैं। तो दूसरी अपनी मां के सिखाए गुर के आधार पर मलखंभ की प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर रही हैं।
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आरवी सिंह व उनकी मां मलखंभ कोच धीरज कुमार वर्मा एवं डॉ. संजया शर्मा अपनी बेटी के साथ। - फोटो : स्वयं
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विस्तार
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मां सिर्फ जीवन ही नहीं देती, वह बच्चों के सपनों को भी दिशा देती है। कई बार बच्चों के कॅरिअर और सोच पर मां के संघर्ष, मेहनत और काम का गहरा असर पड़ता है। मदर्स डे पर ऐसी ही मां-बेटी की जानकारी आपसे साझा कर रहे हैं, जहां बेटी ने मां के कदमों पर चलते हुए उसी क्षेत्र में अपना कॅरिअर बनाया। परिवार की विरासत को आगे बढ़ा रही हैं।
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मां की तरह ही बेटी भी डॉक्टर बन कर रहीं समाज की सेवा
मां की ममता के साथ बेटी को चिकित्सा के गुर भी सिखाए। आज मां की तरह ही बेटी भी डॉक्टर बनकर समाज की सेवा कर रही हैं। हम बात कर रहे हैं महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज की गायनी विभागाध्यक्ष रह चुकीं डॉ. संजया शर्मा की, जो कि वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ हैं।

डॉ. संजया शर्मा के पास करीब चार दशक का अनुभव है। वह हाईरिस्क प्रेगनेंसी और गायनी सर्जरी की विशेषज्ञ हैं। उनके कई शोधपत्र भी प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि पति डॉ. सुनील शर्मा भी चिकित्सक हैं। ऐसे में शुरू से ही बेटा और बेटी का जुड़ाव चिकित्सा क्षेत्र से हो गया। बेटी डॉ. सुप्रिया मिश्रा की रुचि देखकर वह नौकरी के साथ चिकित्सा से जुड़ी जानकारियां बताती रहती थीं। नवीं कक्षा में बेटी ने बायोलॉजी स्ट्रीम को चुना। बेटी शुरू से ही मेधावी थी। सीखने की ललक के साथ ही समझने की क्षमता भी बहुत बेहतर थी। हालांकि, बेटी ने मां की तरह गायनेकोलॉजिस्ट बनने के बजाय फिजीशियन बनने की राह चुनी। जबलपुर के नेताजी सुभाषचंद्र मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद बीपी कोइराला इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज नेपाल से एमडी की डिग्री हासिल की। मौजूदा समय में वह शाहजहांपुर मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग में तैनात हैं।
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मलखंभ कोच ने अपनी बेटी के हुनर को भी तराशा
शानदार मलखंभ खिलाड़ी और अब कोच की भूमिका निभा रहीं धीरज कुमार वर्मा ने इस खेल में अपनी बेटी के हुनर को भी तराशा है। आज उनकी बेटी भी मलखंभ खेल में राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर मेडल अपने नाम कर चुकी है। छोटी सी उम्र में बेटी को मिली सफलता के पीछे मां की मेहनत और मार्गदर्शन साफ दिखाई देता है।

अंडर-12 वर्ग में राष्ट्रीय स्तर पर कांस्य और राज्य स्तर पर जीता स्वर्ण पदक
मलखंभ की कोच धीरज कुमार वर्मा ने वर्ष 1998, 1999 और 2000 में राष्ट्रीय स्तर पर मलखंभ प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर रजत पदक जीते हैं। प्रदेश स्तर पर भी रजत पदक हासिल किया है। बचपन से ही मलखंभ के प्रति उनका गहरा लगाव था। शादी के बाद भी उन्होंने अपने खेल को नहीं छोड़ा। उनके पति ने हर कदम पर उनका सहयोग किया, जिससे उनका आत्मविश्वास और मजबूत हुआ। वह पिछले कुछ वर्षों से निजी स्कूल में बच्चों को मलखंभ का प्रशिक्षण दे रही हैं। चार वर्ष पहले उनकी बेटी आरवी ने भी मलखंभ सीखने की इच्छा जताई। उन्होंने बेटी को भी प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया। प्रशिक्षण के साथ ही बेटी को खेल के प्रति अनुशासन और मेहनत की भी सीख दी। उनके सिखाए गुर के आधार पर आरवी भी आज मलखंभ की प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर रही हैं। आरवी अंडर-12 वर्ग में राष्ट्रीय स्तर पर कांस्य और राज्य स्तर पर स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं।
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