झांसी। मां के दूध ने कोरोना काल में नवजातों की रक्षा की। मेडिकल कॉलेज में जन्म के बाद कोरोना पॉजिटिव हुए एक से सात दिन तक के सभी 10 नवजातों ने कोरोना से जंग जीती है। एक को भी वायरस मात नहीं दे पाया है। नवजातों का रिकवरी रेट शत-प्रतिशत रहा है।
झांसी मेडिकल कॉलेज में कोरोना संक्रमित लगभग 40 महिलाओं की डिलीवरी हुई। कुछ प्रसूताओं की डिलीवरी कराने में कोरोना की जांच रिपोर्ट आने तक का इंतजार नहीं किया जा सकता था, ऐसे में डॉक्टरों को जल्द ही प्रसव कराना पड़ा। इस दौरान कुछ डॉक्टर और स्टाफ भी कोरोना संक्रमित हो गए। साथ ही लगभग 10 बच्चों को भी वायरस ने अपनी चपेट में ले लिया। रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर उन्हें कोविड अस्पताल में भर्ती कर दिया गया।
कुछ ही दिन के उपचार के बाद सभी नवजातों की रिपोर्ट निगेटिव आती चली गई। अब सभी बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हैं। किसी को भी कोविड से ठीक होने के बाद भी कोई समस्या नहीं हुई है। वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना शरीर में तेजी से फैलता है। साथ ही खतरनाक इंफ्लेमेटरी मीडिएट केमिकल छोड़ता है। अधिक प्रतिरोधक क्षमता होने से अधिक केमिकल का रिसाव होता है। जबकि, नवजातों की प्रतिरोधक क्षमता कम होने की वजह से इस केमिकल का रिसाव कम होता है। इससे खतरा भी कम होता है। वहीं, मां का दूध उनके लिए आहार के साथ ही इम्यूनिटी बढ़ाने का काम करता है।
एक से सात दिन तक के लगभग 10 नवजात कोरोना को हराकर पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं। इस मामले में झांसी का रिकवरी रेट शत-प्रतिशत है। किसी भी नवजात की कोरोना से जान भी नहीं गई है।
- डॉ. ओमशंकर चौरसिया, बाल रोग विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज।