मौत से जंग जीते, दूसरों को बचाने में कुर्बान किया खून का कतरा-कतरा
झांसी। याद कीजिए, कोरोना काल में लोग मर रहे थे। संक्रमितों की संख्या इस कदर थी कि अस्पतालों में बेड कम पड़ रहे थे। एक ऐसा मर्ज, जिसका इलाज चिकित्सा जगत के पास नहीं था। बाद में पता चला कि स्वस्थ हो चुके कोरोना संक्रमिताें का प्लाज्मा गंभीर संक्रमण से जूझ रहे मरीजों के लिए संजीवनी साबित हो रहा है। फिर क्या था, मौत से जंग जीतकर स्वस्थ हुए झांसी के कुछ लोग बिना किसी संकोच के प्लाज्मा डोनेट करने मेडिकल कॉलेज पहुंच गए। कुछ ने तो तीन-तीन बार प्लाज्मा दान किया, जिससे छह मरीजों को लाभ मिला। इससे प्लाज्मा दान करने वाले बहुत संतुष्ट हैं। जिन लोगों को इन लोगों का प्लाज्मा चढ़ाया गया कोई प्रत्यक्ष संबंध न होने के बावजूद उनकी खैर खबर लेते हैं।
मुझे ईश्वर ने मौत के मुंह से निकाला, भला मदद क्यों न करता
प्रेमगंज सीपीरी बाजार निवासी अनिल पांडेय (45) एक निजी कंपनी में मैनेजर हैं। उन्हें और उनकी छोटी बेटी को नवंबर 2020 में कोरोना संक्रमण हुआ। बाद में दोनों स्वस्थ हो गए। इसके बाद उन्हें पता चला कि संक्रमण के कारण रेलवे के एक कर्मचारी की हालत बहुत गंभीर है और वेंटीलेटर पर हैं। उनसे कहा गया है कि जीवन बचाने के लिए वे तत्काल किसी स्वस्थ मरीज से प्लाज्मा डोनेट करवाएं। मरीज के भाई का नंबर मिला तो खुद संपर्क किया। यह सुनते ही मरीज के परिजनों को उम्मीद जगी। वे उत्साहित हो गए। उन्होंने पूछा कि आप कौन हैं, कहां हैं, हम आपको घर से लेने आ जाते हैं। इस पर अनिल ने कहा कि ईश्वर ने मौत के मुंह से निकालकर सक्षम बनाया है। अब मैं स्वस्थ हूं, खुद मेडिकल कॉलेज पहुंच जाऊंगा। उन्होंने ऐसा ही किया। टेस्ट हुए और पाया कि एंटी बॉडीज बनी हैं। प्लाज्मा कारगर साबित होगा। प्लाज्मा डोनेट किया। रेलवे के वह कर्मचारी भी आज पूरी तरह स्वस्थ हैं और नौकरी पर लौट आए हैं।
छह मरीजों के काम आ सका, मुझे सुकून है
सिविल लाइंस निवासी विवेक जैन (45) व्यापारी हैं। इन्हें नवंबर 2020 में कोरोना हुआ। बुखार नहीं जा रहा था, गंध और स्वाद का अहसास नहीं हो रहा था। बाद में वह स्वस्थ हुए। जब सामान्य हुए तो उन्हें पता चला कि विश्वभर में महामारी से लोग लगातार मर रहे हैं। देश, प्रदेश और झांसी का भी यही हाल है। उन्हें यह भी पता चला कि गंभीर संक्रमण से जूझ रहे मरीजों को प्लाज्मा दान कर बचाया जा सकता है। फिर क्या था उन्होंने ठान लिया कि वे भी प्लाज्मा दान करेंगे। शहर के एक ट्रांसपोर्टर की तबीयत बहुत खराब थी। उन्हें प्लाज्मा चाहिए था। विवेक तुरंत मदद के लिए पहुंच गए। यही नहीं, उन्होंने तय समय के बाद लगातार तीन बार प्लाज्मा डोनेट किया। हर बार मेडिकल कॉलेज में 400 मिलीलीटर लिया गया। मर्ज से जूझ रहे एक मरीज को एक बार में 200 मिली लीटर चढ़ाया जाता है। इस तरह उनके तीन बार प्लाज्मा डोनेट करने का फायदा छह मरीजों को मिला। इसका विवेक को बहुत सुकून है।