- केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने किया शोध
संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। सूखे की मार झेलने वाले बुंदेलखंड के किसानों के लिए रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विवि के वैज्ञानिकों ने खेती का नया तरीका विकसित किया है। अपने एक शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने गेहूं की पराली को खेत से हटाए बिना मूंग की बुवाई की। इससे वैज्ञानिकों को मूंग की पांच क्विंटल अधिक उपज प्राप्त हुई। साथ ही सिंचाई के लिए पानी की मात्रा भी आधी रह गई।
कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि बुंदेलखंड में किसानों के सामने सिंचाई के पानी की काफी किल्लत रहती है। दूसरी समस्या पराली को लेकर है, इसमें किसान गेहूं की कटाई के बाद खेतों में पराली जलाते हैं। एक साल से कृषि विवि के वैज्ञानिक डॉ. योगेश्वर सिंह, डॉ. अनिल कुमार राय, डॉ. सुशील कुमार सिंह, डॉ. शिवेंद्र सिंह और डॉ. राजवीर यादव विश्वविद्यालय के कृषि फार्म पर शोध कर रहे हैं।
शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने गेहूं के खेत से पराली हटाए बिना एक हेक्टेयर भूमि पर मूंग की बुवाई की थी। बताया कि बुवाई के तुरंत बाद एक पानी देने से बीज का अंकुरण सामान्य खेती की प्रक्रिया से तेज होता है। जहां आमतौर पर खेती में आठ से 10 बार पानी की जरूरत होती है, तो पराली के साथ खेती करने के दौरान मात्र तीन से चार बार ही पानी लगाया गया। इसके अलावा भूमि की गुणवत्ता में भी बढ़ोतरी देखी गई। वैज्ञानिकों ने बताया कि जहां जुताई और दस पानी देने के बाद एक हेक्टेयर में 20 क्विंटल उपज मिल रही है तो वहीं, पराली के साथ एक हेक्टेयर में 25 क्विंटल उपज प्राप्त हुई।
वर्जन
पराली प्रबंधन और पानी की कमी को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिकों ने शोध किया है। इसके सकारात्मक परिणाम आए हैं। किसानों को भी इसे अपनाना चाहिए।
- डॉ. अशोक कुमार सिंह, कुलपति, केंद्रीय कृषि विवि।