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घपले में घिरी मनरेगा, अब मजदूरों को नहीं मिल रही मजदूरी

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झांसी। कोविड-19 के प्रकोप के चलते गांव लौटने वाले मजदूरों को रोजगार के लिए सरकार ने करोड़ों रुपये दिए लेकिन, अफसरों की मिलीभगत से योजना का बड़ा हिस्सा घोटाले की भेंट चढ़ गया वहीं, डेढ़ माह से मनरेगा मजदूरों को मजदूरी भी नहीं मिल रही। अब मुख्यमंत्री योजना की समीक्षा खुद करने आ रहे हैं, ऐसे में सीएम के कोप से बचने के लिए आज दिन भर आंकड़ों को दुरुस्त करने का खेल चलता रहा।
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मनरेगा के जरिए शुरू में 5999.72 लाख रुपये का प्रावधान किया गया था लेकिन, कोविड-19 के प्रकोप के बाद सरकार ने मजदूरों को गांव में ही रोजगार देने के लिए इसको बढ़ाते हुए 10260 लाख कर दिया। मनरेगा के जरिए पहली बार इतनी बड़ी रकम का प्रावधान हुआ लेकिन, पैसों के सही उपयोग की निगरानी व्यवस्था तैयार नहीं हुई लिहाजा योजना के क्रियान्वयन में खूब मनमानी की गई। सबसे अधिक गड़बड़ी कच्चे काम एवं व्यक्तिगत लाभार्थी योजना में सामने आई है।
व्यक्तिगत लाभर्थी योजना में किसानों के खेतों के समतलीकरण, बंधीकरण समेत अन्य कार्य कराए जाने थे लेकिन, तमाम गांवों में बिना काम कराए ही पैसे निकाल लिए गए। कई मामलों की शिकायतों की जांच अभी भी चल रही है। जिन मामलों में गड़बड़ी पकड़ी गई, उनमें भी कई माह बीतने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में मुख्यमंत्री की ओर से समीक्षा किए जाने के बाद से अफसरों में हड़कंप मचा हुआ है। मुख्यमंत्री का कार्यक्रम तय होने के बाद से फाइलें दुरुस्त की जाने लगीं, जिससे उनके कोप से बचा जा सका। वहीं, पिछले डेढ़ महीने से मनरेगा मजूदरों की मजदूरी भी नहीं मिल रही है।
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इन ग्राम पंचायतों में पकड़े गए घपले
खिल्ली, रानापुरा, खजराहाबुजुर्ग, सेमरी, जखौरा, चौकरी, खनुआ, खड़ौरा, पसौरा, अचौसा, फरीदा, करगुवांखुर्द, बरगायखंगरा
केस एक- बामौर ब्लॉक के एक दर्जन से अधिक गांवों में व्यक्तिगत लाभार्थी योजना के तहत होने वाले कामों को बिना कराए ही लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया। गोपनीय जांच में गड़बड़ी की पुष्टि भी हो चुकी लेकिन, तीन महीन बाद भी घोटाले के आरोपियों के खिलाफ मामला आगे नहीं बढ़ सका। यह मामला अभी तक फाइलों में ही कैद है।
केस-दो-मऊरानीपुर के बिगौना गांव में मनरेगा से कराए गए कामों में जमकर गड़बड़ी की गई। टीएसी जांच में ग्राम प्रधान राम प्रसाद, सचिव हरिश्चंद्र पटेल एवं रोजगार सेवक से कुल 63 हजार की रिकवरी करने के आदेश हुए लेकिन, वित्तीय गड़बड़ी को लेकर किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।
केस तीन- ग्राम सेमरी में भी मनरेगा के जरिए गड़बड़ी र्हुई। तत्कालीन ग्राम प्रधान शिवा देवी, ग्राम विकास अधिकारी वीर सिंह यादव, तकनीकी सहायक भगवती शरण कौशिक से वसूली के निर्देश हुए लेकिन, इनके खिलाफ भी कार्रवाई नहीं हुई।
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