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झांसी: लापता हुए अपनों की राह देखते-देखते सूख गए परिजनों के आंसू, अब तक नहीं लौटे वापस

Thu, 18 Mar 2021 12:59 PM IST
झांसी ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, झांसी
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लापता अपने
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अपनों के बिछड़ने का दर्द केवल वही लोग बयां कर सकते हैं जो पिछले कई सालों से लापता हुए अपनों की तलाश में दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। आज भी लोग घर की चौखट पर टकटकी लगाए उनका इंतजार करते रहते हैं। उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में दो साल में लापता हुए 103 लोगों का अब तक पता नहीं चल सका है। उनकी राह देखते हुए परिजनों की आंखें भी पथरा गई हैं। 
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साल 2018 से अब तक जिले में 423 लोगों के लापता होने के मुकदमे थानों में दर्ज हुए हैं। इनमें से लापता 103 लोगों का अब तक पता नहीं चला है। इनको खोजने के लिए विशेष योजना तो बनी, लेकिन कारगर साबित नहीं हो सकी। नतीजा यह है कि लोग आज भी अपनों की तलाश में थाने और चौकियों से लेकर अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। 

लेकिन, उन्हें आश्वासन के अलावा अभी तक कुछ नहीं मिल पाया है। कोतवाली व थानों पर लगे नोटिस बोर्ड पर ही गुमशुदगी की तलाश की जा रही है। मगर पुलिस इनकी बरामदगी के लिए कोई हरकत करती नजर नहीं आ रही। 
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फीका पड़ा ऑपरेशन मुस्कान
लापता बच्चों की संख्या पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ऑपरेशन मुस्कान चलाने का आदेश दिया था। जिले में भी इसकी शुरूआत हुई थी। इस अभियान के तहत घर से भटके और होटलों आदि में काम करने वाले बच्चों के बारे में पता कर पुलिस द्वारा उन्हें घर पहुंचाया जाना था। लेकिन यह मुहिम फीकी नजर आने लगी है।
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केस 1
मेंहदी बाग में रहने वाले मोहित साहू 8 मार्च 2019 को कॉलेज जाने के लिए निकले थे, इसके बाद वह वापस नहीं लौटे। पुलिस ने उसकी खूब खोजबीन की, लेकिन पता नहीं चला। दो साल बीतने के बाद भी पुलिस उसका कोई सुराग नहीं लगा सकी। 

केस 2
कुंजबिहार मंदिर के पास रहने वाले अशोक सेन 20 जून 2017 को अचानक लापता हो गए थे। लंबा समय बीत जाने के बाद भी आज तक उनका पता नहीं लग सका। वे एक स्कूल में अध्यापक हैं। पत्नी भी चक्कर लगाकर थक चुकी हैं।

केस 3
बाबूलाल कारखाने के पास रहने वाले पंकज गुप्ता एक फाइनेंस कंपनी में काम करते थे। 24 मई 2017 की सुबह सवा नौ बजे वह ऑफिस के लिए निकले थे। इसके बाद वह वापस नहीं लौटे। तीन साल बीतने के बाद भी उनका कोई सुराग नहीं लगा। 

यह करती पुलिस
- महिला या किसी अन्य के लापता होने पर उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करना।
- गुमशुदगी के बाद पुलिस उनके पोस्टर हर थाने पर भेजती है।
- डीसीआरबी के जरिए सभी को इसके बारे में जानकारी दी जाती है ताकि गुमशुदा के बारे में कहीं से भी जानकारी मिल सके।

एसपी सिटी विवेक त्रिपाठी ने बतया कि लापता लोगों को बरामद करने के लिए पुलिस की टीमें बनाई गई हैं। जो विभिन्न राज्यों में भी जाकर जानकारी जुटाती हैं। कई लोगों को पुलिस टीम ने बरामद किया है। कुछ लोगों को बरामद करने के प्रयास लगातार जारी हैं। बरामदगी को लेकर समीक्षा भी जा रही है। 
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