झांसी में आरपीएफ और जीआरपी के जवानों की लापरवाही की कीमत मीरा अहिरवार ने अपनी जान देकर चुकाई। मीरा और उसके पति महेंद्र शनिवार देर रात उत्तर प्रदेश संपर्क क्रांति एक्सप्रेस में जहर खुरानी के शिकार हुए थे। जवानों ने उन्हें अस्पताल ले जाने के स्थान पर घर भेज दिया था।
समय पर इलाज ने मिलने से मीरा की मौत हो गई, जबकि महेंद्र की हालत अब भी गंभीर बनी है। एसपी रेलवे ने मामला दर्ज कर जांच के आदेश दिए हैं। उत्तर प्रदेश संपर्क क्रांति से में सवार होकर शनिवार देर रात दिल्ली से झांसी आए उल्दन थाना क्षेत्रांतर्गत दादपुरा संतपुरा निवासी महेंद्र अहिरवार और उसकी पत्नी मीरा प्लेटफार्म एक पर जहरखुरानी का शिकार बन गए थे।
ल्ली से साथ आए एक आदमी और औरत ने उनको बातों के जाल में फंसाकर जहरीली चाय पिला दी थी। दंपति के बेहोश होते ही आरोपी यात्री के पेंट के अंदर की जेब से 45000 रुपये ले गए थे। बाद में रेलवे चिकित्सक ने उपचार देकर किसी तरह उनको होश में लाने की कोशिश की। थोड़ी हालत ठीक होने पर रेलवे चिकित्सक ने मौके पर मौजूद आरपीएफ और जीआरपी के जवानों को दोनों को मेडिकल कॉलेज भेजने की सलाह दी।
मगर, जीआरपी और आरपीएफ जवानों ने घटना की जानकारी लेने के बाद दंपति को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराने की जगह ऑटो में बैठाकर बस स्टैंड भेज दिया। उस समय मीरा हल्के होश में थी। बस स्टैंड पहुंचने पर वे दोनों किसी तरह बस में बैठे और बंगरा के आगे दादपुरा के पास बंधी पर उतर गए। बंधी पर उतरने के बाद दोनों गिरकर बेहोश हो गए।
मौके से गुजरे गांव वाले दोनों को देखते ही पहचान गए। खबर लगने पर परिजन भी मौके पर पहुंच गए। दोनों को बंगरा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले लाया गया, जहां चिकित्सकों ने हालत गंभीर देख उनको मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया। दोनों को रविवार की रात नौ बजे मेडिकल कॉलेज के वार्ड नंबर आठ में बने आईसीयू में भर्ती कराया गया। यहां सोमवार की सुबह 11 बजे मीरा ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।
इधर, मीरा की मौत की खबर लगने पर एसपी (रेलवे) डॉ. ओमप्रकाश सिंह, सीओ (रेलवे) शरद प्रताप सिंह, प्रभारी निरीक्षक रघुवीर सिंह फोर्स के साथ मेडिकल कॉलेज पहुंच गए। यहां एसपी (रेलवे) ने महेंद्र से बातचीत कर घटना की जानकारी ली।