झांसी। बिजली गुल रहने से अस्पतालों में भर्ती मरीजों का भी बहुत बुरा हाल है। जनरेटर एसी, कूलर का लोड नहीं उठा पा रहे हैं। बहुत आवश्यकता पर ही पावर लाइन कनेक्शन दिया गया है। इससे वार्डों में सभी पंखे नहीं चल पाते। जहां चलते भी हैं, तो उमस और गर्मी में गर्म हवा फेंक रहे हैं। वहीं, अस्पताल में डीजल का बजट न होने से और मुसीबत खड़ी हो गई है।
भीषण गर्मी में झांसी में कुछ दिनों से बिजली का बहुत संकट है। घरों में रहने वाले लोग तो इससे परेशान हैं ही, सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों का भी हाल बेहाल है। मेडिकल कॉलेज में बिजली गुल रहने पर जनरेटर तो चलाया जाता है मगर आवश्यक जगहों पर ही पावर लाइन कनेक्शन होने पर सभी मरीजों को राहत नहीं मिल पाती। जनरेटर एसी, कूलर का लोड उठाने में अक्षम है और कहीं-कहीं पंखे चलते भी हैं, तो गर्म हवा फेंकते हैं। इससे मरीज बिलबिला रहे हैं।
वहीं, मेडिकल कॉलेज प्रशासन के सामने बजट का रोना है। जनरेटर को जरूरी डीजल के लिए सरकार बजट नहीं देती है। अन्य मद में मिलने वाले पांच लाख रुपये बजट के बजट से डीजल की खरीद की जाती है। बीते पांच दिनों में ही मेडिकल कॉलेज के जनरेटर एक लाख रुपये का डीजल पी गए हैं। अब कॉलेज प्रशासन के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं कि यदि आगे भी बिजली संकट जारी रहा तो जनरेटर चलेंगे कैसे।
आईसीयू में नहीं, ओटी में एक चलता एसी
बिजली गुल रहने से मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में भर्ती सीरियस मरीजों को बहुत परेशानी हो रही है। आईसीयू में एक भी एसी नहीं चल पा रहा, जबकि ऑपरेशन थिएटर में सिर्फ एक एसी ही चलता है। इसके साथ ही बत्ती गुल रहने के समय ओटी को आवश्यक औजार, कॉटन आदि का स्ट्रेलाइजेशन भी नहीं हो पाता है। बीते दो दिनों से तो पानी की भी भीषण समस्या हो गई है।
छह जनरेटरों के शासन से मांग
मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर ने बिजली संकट के मद्देनजर 125 केवी के छह जनरेटरों की मांग शासन से की है। इसके अलावा निक्कू वार्ड के लिए किराए पर जनरेटर मंगवाया है। वहीं, 400 केवी का खराब पड़े जनरेटर को सही करने के निर्देश दिए हैं। गर्मी के चलते वार्डों में जल्द ही बीस कूलर लगवाए जाएंगे।