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Jhansi News: मंत्री जी, झांसी में देखो कमीशन का खेल, मरीज इनके ठेंगे पर, सरकारी अस्पताल फेल

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झांसी। स्वास्थ्य मंत्री जी, झांसी में स्वास्थ्य सेवाएं मर्ज नहीं बल्कि मरीजों को ही काट रही हैं। यहां मेडिकल कॉलेज से लेकर स्वास्थ्य विभाग तक में पर्याप्त डॉक्टर नहीं हैं। सरकारी अस्पतालों में धड़ल्ले से बाहर की दवाइयां लिखी जा रहीं। जिला अस्पताल में एमआरआई जांच के लिए मशीन सालों बाद भी नहीं लग पाई है। मेडिकल कॉलेज में सीटी स्कैन और एमआरआई मशीन तीन माह से खराब पड़ी हैं। डॉक्टरों की कमीशनखोरी और बाहर की दवाएं लिखने के कारण झांसी में प्रधानमंत्री जन औषधि योजना भी फेल हो गई। जनपद में 14 जन औषधि केंद्र खोले गए थे। इनमें छह केंद्र बंद हो चुके हैं। केंद्र संचालकों का कहना है कि डॉक्टर जन औषधि दवाएं लिखते ही नहीं हैं। एक आंकड़े के अनुसार झांसी में हर महीने करीब 15 करोड़ रुपये की ब्रांडेड दवाएं बिकती हैं। जबकि, महज 50 लाख रुपये की ही जन औषधि दवाओं की बिक्री हो पाती है। यहां दलाली का नेटवर्क इतना बड़ा हो गया है कि खून हो या बड़े मर्ज का इलाज, मरीज बेचारे मारे-मारे फिरने को मजबूर हैं। अक्सर कैंसर, हार्ट, ब्रेन हैमरेज और न्यूरो से संबंधित बीमारी को लेकर मरीज और उनके तीमारदार दिल्ली, ग्वालियर, कानपुर, लखनऊ, भोपाल और मुंबई भागते हैं। इतना ही नहीं दुर्घटना में घायल गंभीर मरीज तक आए दिन मेडिकल कॉलेज से ग्वालियर जाते हैं। जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में शुगर नापने के लिए स्ट्रिप तक नहीं मिल पाती हैं। ऐसे में मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल बस नाम भर के हैं...जबकि यहां बजट करोड़ों का है। ऐसे में कई जगह सरकारी तंत्र के नीचे प्राइवेट अस्पतालों का नेटवर्क यहां खूब फल-फूल रहा है, और तो और एंबुलेंस सेवा तक में दलाली का दलदल बढ़ता जा रहा है। इसके कई वीडियो तक वायरल हो चुके हैं। आए दिन मरीज और उनके तीमारदार कहते मिलते हैं कि झांसी में स्वास्थ्य सेवाएं लाचार हो चुकी हैं। मरीजों की सुनने वाला कोई नहीं।
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मंत्री जी, कब करेंगे इन पांच समस्याओं का निदान.. पूछ रहे झांसी वाले
1-12 करोड़ जारी फिर भी शुरू नहीं हुआ 500 बेड का अस्पताल
मेडिकल कॉलेज में निर्माणाधीन 500 बेड अस्पताल के लिए शासन द्वारा लगभग दो महीने पहले 12 करोड़ रुपये का बजट जारी किया जा चुका है। कॉलेज प्रशासन ने कार्यदायी संस्था के खाते में पैसा ट्रांसफर भी कर दिया है। मगर अब तक संस्था ने कॉलेज का निर्माण शुरू नहीं किया है।
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तीन महीने से ठप है सीटी स्कैन, एमआरआई

महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में पिछले तीन महीने से सीटी स्कैन और एमआरआई मशीन खराब पड़ी हुई है। ये मशीनें 10 से 12 साल पुरानी हो चुकी हैं। शासन ने इन्हें सुधरवाने के लिए बजट नहीं दिया है। इसकी मांग कॉलेज प्रशासन ने शासन से की है। साथ ही नई मशीन के लिए भी बजट मांगा है। बताया गया कि मेडिकल कॉलेज में रोजाना 50 मरीज सीटी स्कैन और 20 मरीज एमआरआई जांच कराने के लिए आते हैं।
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कैंसर के मरीज की नहीं होती सिकाई, मशीन ही नहीं
मेडिकल कॉलेज में पहले तो रखे-रखे कोबाल्ट मशीन खराब हो गई। फिर इसको हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई तो मशीन चोरी हो गई। चूंकि, बुंदेलखंड में तंबाकू का सेवन लोगों द्वारा ज्यादा किया जाता है। ऐसे में यहां पर खासकर मुख कैंसर के मरीज काफी हैं। मेडिकल कॉलेज में हर साल कैंसर के 750 मरीज पंजीकृत होते हैं। इसमें लगभग 500 मरीजों को सिकाई की जरूरत पड़ती है। मशीन न होने से कैंसर रोगियों की सिकाई नहीं हो पाती है। सिकाई कराने के लिए मरीजों को ग्वालियर, कानपुर, लखनऊ, भोपाल, मुंबई और दिल्ली जाना पड़ता है।
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छह साल बीते, नहीं लग पाई एमआरआई मशीन
शासन ने वर्ष 2017 में झांसी समेत 18 मंडल मुख्यालयों में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर एमआरआई मशीन लगवाने की मंजूरी दी थी। इसके लिए 1500 स्क्वॉयर फुट जगह की जरूरत है। पहले तो लंबे समय तक अस्पताल प्रशासन मशीन की स्थापना के लिए जगह तय नहीं कर पाया। बाद में क्षेत्रीय निदान केंद्र में मशीन की स्थापना का प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया। दो साल पहले ये प्रस्ताव जाने के बावजूद अब तक झांसी में एमआरआई जांच शुरू नहीं हो पाई है।
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मेडिकल कॉलेज से लेकर स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों के कई पद रिक्त
झांसी में डॉक्टरों की भी काफी कमी चल रही है। मेडिकल कॉलेज के आंकड़ों को देखें तो यहां पर डॉक्टरों के 160 पद हैं। इनमें 115 पद भरे हुए हैं। इसमें 58 नियमित तो 57 संविदा पर डॉक्टर तैनात हैं। जबकि, 54 पद खाली हैं। वहीं, स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों के 170 पद स्वीकृत हैं। इनमें 92 भरे और 78 खाली हैं। जबकि, जिला अस्पताल में 46 पद सृजित हैं। मौजूदा समय में 40 चिकित्सक हैं। हालांकि, 26 ही नियमित चिकित्सक हैं। यहां भी छह चिकित्सक नहीं हैं।
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