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पोषाहार में शामिल नहीं हुआ दूध एवं घी

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झांसी। गर्भवती महिलाओं, बच्चों एवं किशोरियों को वितरित किया जाने वाला पोषाहार करीब छह महीने बाद भी पटरी पर नहीं लौट सका। पोषाहार के नाम पर सिर्फ गेहूं एवं चावल ही वितरित हो रहा। तीन महीने बीतने हो हैं, लेकिन दूध व घी का वितरण शुरू नहीं हो सका है।
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कोराना काल आरंभ होने के साथ ही पोषाहार व्यवस्था लड़खड़ाना शुरू हो गई। जुलाई में पंजीरी कंपनियों का विवाद शुरू हो गया तो सरकार ने इसे खत्म करके स्वयं सहायता समूहों से पोषाहार वितरित कराने का निर्णय लिया। इस परिवर्तन के कारण तीन माह तक पोषाहार वितरण ठप रहा। स्वयं सहायता समूहों के जरिए गेहूं और चावल के साथ हर महीने 500 से 750 ग्राम दाल, 400-750 ग्राम दूध और 450-900 ग्राम घी वितरित किया जाना था, लेकिन तीन माह बीत जाने के बाद भी अब तक दूध, घी एवं दाल का वितरण शुरू नहीं हो सका है। अभी तक सिर्फ गेहूं एवं चावल ही वितरित किया जा सका। स्वयं सहायता समूहों के पास अभी तक दाल का स्टॉक भी नहीं है।
उपायुक्त स्वरोजगार डा.एनएन मिश्र का कहना है कि दाल की खरीद स्वयं सहायता समूह अपने स्तर से करेंगी। उनके इसके बदले भुगतान किया जाएगा। यही हाल घी और दूध का है।
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