झांसी। शासन अपनी महत्वाकांक्षी योजनाओं में शुमार सरकारी स्कूलों में मध्यान्ह भोजन पर भले ही समय-समय पर नई-नई गाइड लाइन भेजता हो, लेकिन सच यह है कि जनपद के लगभग 100 सरकारी विद्यालयों में मध्याह्न भोजन मिट्टी के चूल्हे पर पकता है। इनमें जिले के 50 से ज्यादा नए स्कूल भी शामिल हैं, जिन्हें अभी तक रसोई गैस का कनेक्शन अथवा सिलेंडर मुहैया नहीं हो सका है।
उल्लेखनीय है कि सरकारी एवं सहायता प्राप्त स्कूलों में विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ उन्हें मध्याह्न भोजन भी वितरित किया जाता है और इसके लिए मध्याह्न योजना प्राधिकरण तेल, मसाले, सब्जी के लिए प्रति विद्यार्थी के हिसाब से स्कूलों को कन्वर्जन कास्ट भेजता है।
लेकिन इसमें गैस सिलेंडर की खरीद का प्रावधान नहीं है। ऐसे में रसोई गैस सिलेंडर के लिए ग्रामीण एवं नगर क्षेत्र के स्कूलों को विद्यालय विकास निधि पर आश्रित रहना पड़ता है। वहीं मध्याह्न भोजन पकाने को लेकर भी कोई विशेष गाइड लाइन नहीं है।
कई विद्यालयों के शिक्षकों के मुताबिक मिट्टी के चूल्हे पर खाना पकाने से जहां लकड़ी व ईंधन जुटाना पड़ता है। वहीं, विद्यालय परिसर में धुआं फैलता है और आग की आशंका बनी रहती है। कई शिक्षकों के मुताबिक गैस सिलेंडर अथवा कनेक्शन के लिए गैस एजेंसियों पर कई बार संपर्क किया है, लेकिन अभी तक न तो कनेक्शन मिला और न ही रसोई गैस सिलेंडर।
इन शिक्षकों के मुताबिक उक्त समस्या को लेकर कई बार विभाग को जानकारी भी दी गई। वहीं विभाग द्वारा इसकी सूचना जिला प्रशासन को दी जा चुकी है, लेकिन समस्या जस की तस है।
मध्याह्न भोजन योजना के प्रारंभ में गैस सिलेंडर के लिए विभाग द्वारा धनराशि जारी की गई थी। प्रयास है कि सभी विद्यालयों में रसोई गैस सिलेंडर की व्यवस्था हो।
- जीएस राजपूत, एडी बेसिक