बुंदेलखंड के किसानों की दशा मेंथा (पिपरमेंट) की खेती बदल सकती है। किसान एक एकड़ में फसल उपजाकर लगभग एक लाख रुपये तक मुनाफा कमा सकते हैं। यही कारण है कि जिले के कई किसानों ने चना, मटर, मसूर, सरसों, गेहूं की परंपरागत खेती को छोड़ अब मेंथा (पिपरमेंट) की खेती शुरू कर दी है। यह उनकी आय बढ़ाने में मददगार साबित हो रही है। यह खेती उन्हीं इलाकों में हो पा रही है, जहां पर्याप्त पानी की सुविधा उपलब्ध है।
बुंदेलखंड में वैसे पानी की कमी है, लेकिन कई इलाके ऐसे हैं, जहां नहरें निकली हैं, भूमिगत पानी भी काफी है। इन इलाकों के किसानों के लिए मेंथा की खेती भारी मुनाफा का सौदा साबित हो रही है। किसान से दस से पंद्रह हजार रुपये की लागत लगाकर एक एकड़ में एक लाख तक का मुनाफा कमा रहे हैं। खास बात यह है कि मेंथा की खेती को अन्ना पशुओं से भी नुकसान नहीं होता है। मेंथा की पौध रोपाई अगस्त व सितंबर माह में और जड़ों की बुवाई जनवरी व फरवरी माह में की जाती है। रोपाई के बाद पहली कटाई 110 से 120 दिन में की जाती है। दूसरी कटाई 70 से 80 दिन में होती है। यानी एक बार फसल की बुवाई के बाद दो बार उसका उपयोग किया जा सकता है। जनपद के मोंठ, गुरसराय, गरौठा के कई किसान इसकी खेती कर रहे हैं। पिपरमेंट आसानी से बिक भी रहा है।
बुंदेलखंड में जिन क्षेत्रों में नहरों का जाल है व पर्याप्त मात्रा में पानी हैं वहां किसान मेंथा उत्पादन कर अपनी आय बढ़ा सकते हैं। यह नकदी फसल है। भुगतान तुरंत मिल जाता है। पिपरमेंट का तेल का उपयोग विभिन्न उद्योगों जैसे कन्फेक्शरी, साबुन व ठंडे तेल में होता है।
- सुधीर कुमार जिला कृषि अधिकारी झांसी