अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में मेनिनजाइटिस का शिकार तीन मरीज भर्ती हैं। इनमें अग्निकांड के बाद बचाया गया एक नवजात भी शामिल है। डॉक्टरों का कहना है कि इस बीमारी में आमतौर पर फ्लू जैसे ही लक्षण दिखाई देते हैं। मगर इलाज में देरी पर हालत गंभीर होने पर रोगी की जान भी जा सकती है।
इंसानी मस्तिष्क और स्पाइन कॉर्ड के आसपास के ऊतकों के ऊपर की झिल्लियां होती हैं। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. पीके जैन ने बताया कि जब इनमें संक्रमण हो जाता है तो इसे मेनिनजाइटिस कहते हैं। ये बैक्टीरिया, वायरस या फिर टीबी की बीमारी के कारण हो सकता है। इसमें दिमाग में सूजन आ जाती है।
इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, उल्टी और कभी-कभार आंख में दिखाई देने की समस्या शामिल है। बहुत गंभीर स्थिति होने पर मरीज बेहोश भी हो सकता है। बेहोशी के झटके भी आ सकते हैं। यह संक्रमण खतरनाक होता है और इलाज में देरी करने पर मरीज की जान भी जा सकती है। यह बीमारी सांस के संक्रमण, खांसने, छींकने आदि से एक से दूसरे व्यक्ति में फैल सकती है।
मेडिकल कॉलेज के आंकड़े देखें तो मौजूदा समय में मेडिकल कॉलेज में मेनिनजाइटिस के तीन मरीज भर्ती हैं। इसमें मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग में एक और पीडियाटि्रक विभाग में दो रोगी हैं। अग्निकांड में बचाया गया एक नवजात भी इस बीमारी की चपेट में आ गया है। सीएमएस डॉ. सचिन माहुर ने बताया कि तीनों ही रोगियों का अस्पताल में इलाज चल रहा है।