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दवाएं खत्म, कंपनियों ने सप्लाई से किया इंकार

Wed, 22 Nov 2017 01:31 AM IST
amar ujala
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medical college, jhansi news - फोटो : demo
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झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में भी गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कालेज जैसे हालात बन रहे हैं। यहां एक बार फिर दवाएं खत्म हो गई हैं। जीवन रक्षक दवाएं भी खत्म होने को हैं। बकाया भुगतान नहीं होने के कारण कंपनियों ने सप्लाई देने से भी इंकार कर दिया है। मरीज बाहर से दवाएं खरीदने को मजबूर हैं। कॉलेज प्रशासन ने शासन स्तर से कई बार पत्राचार किया, लेकिन अब तक बजट नहीं मिल सका है।
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गोरखपुर में ऑक्सीजन की सप्लाई न होने की वजह से कई बच्चों की मौत हो गई थी। लगता है कि इसके बाद भी सूबे का स्वास्थ्य महकमा नहीं चेता है। अब झांसी के मेडिकल कॉलेज में दवाएं खत्म हैं। जीवन रक्षक दवाएं भी नाम को ही बची हैं। यदि शीघ्र ही इंतजाम नहीं हुआ तो मरीजों की जान पर बन सकती है। सितंबर के शुरूआती सप्ताह से ही बजट खत्म हो गया था। इसके बाद उधारी पर दवाओं की खरीद शुरू की गई थी। नियमानुसार कुल बजट का दस फीसदी ही उधार दवाएं खरीद सकते हैं, जिसकी सीमा भी अब पूरी हो चुकी है। ऐसे में अब मेडिकल कॉलेज दवाएं भी खरीद नहीं सकता। दूसरी तरफ, शासन स्तर से रेट कांट्रेक्ट होने वाली कंपनियों ने भी दवाएं देने से साफ इंकार कर दिया है। उनका लगभग 38 लाख रुपये मेडिकल कॉलेज पर उधार है। अब ओपीडी, वार्ड और इमरजेंसी के मरीजों को दवाएं नहीं मिल रही है।

अब हाल यह है कि डॉक्टर बाहर की दवाएं लिख रहे हैं। गरीब मरीजों के लिए मेडिकल कॉलेज निजी नर्सिंग होम जैसा हो गया है। इलाज कराना उनके बस के बाहर हो गया है। हाल ये है कि एंटीबायोटिक इंजेक्शन भी इमरजेंसी के लिए रखे हुए हैं। सामान्यता तो छह-सात प्रकार के एंटीबायोटिक इंजेक्शन खरीदे जाते हैं लेकिन मौजूदा समय में सिर्फ एमिकासिन ही बचा है। आंखों के फ्लूड भी खत्म होने की कगार पर हैं। बजट के संबंध में प्रभारी मंत्री, प्रभारी प्रमुख सचिव, प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा, महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा को सूचना दी जा चुकी है। जिला प्रशासन के अधिकारियों ने भी शासन को पत्र लिखा है। फिर भी बजट जारी नहीं हुआ है।  
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जीवन रक्षक दवाएं रिजर्व
मेडिकल कॉलेज में जीवन रक्षक दवाएं भी रिजर्व में हैं। मरीजों की गंभीर स्थिति होने पर इस्तेमाल होने वाले दवाएं और इंजेक्शन भी लगभग खत्म हैं। डबीटामिन, डोपामिम, डेक्स्टामीटासोन, हाइड्रोकॉर्टीसोन, सोडाबाईकार्ब जैसी दवाएं और इंजेक्शन कम बचे हैं। सभी मरीजों को उपलब्ध नहीं कराया जा सकता।

पहले से बकाया थे 2.68 करोड़
मेडिकल कॉलेज को इस साल दो-तीन किस्तों में चार करोड़ रुपये मिल चुके हैं। बताया गया कि कॉलेज पर पिछले साल का ही 2.68 करोड़ रुपये बकाया था। इसमें 63 लाख दवाओं, सवा करोड़ केमिकल और 80 लाख रुपये ऑक्सीजन गैस का भुगतान नहीं किया गया था। ऐसे में इस साल सिर्फ 1.32 करोड़ ही खर्च किए जा सके। हालांकि, सरकार ने तीस लाख रुपये गैस के अलग से भेजे थे।

दवा खरीद की नई नीति बन रही
दवा कंपनियों की पिछले साल की बकाया राशि का भुगतान किया गया है। पूरक बजट मिलेगा तो फिर भुगतान कराया जाएगा। दवाओं के रेट कांट्रेक्ट की नई पॉलिसी बन रही है। जल्द ही ई-टेंडर होंगे। हालांकि, इसके पूर्व भी अधिकारियों से बात कर महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में दवाओं की समस्या का समाधान करने का प्रयास किया जाएगा। - डॉ. केके गुप्ता, निदेशक चिकित्सा-शिक्षा।
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