झांसी। दवाओं का कच्चा माल एक बार फिर महंगा हो गया है। इससे जीवनरक्षक दवाओं के दाम बढ़ना तय है। दवा विक्रेताओं ने बताया कि सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली दवा पैरासीटोमोल के रॉ मैटेरियल के दामों में तीन गुना तक का इजाफा हुआ है। कोरोना काल में चीन से दवाओं के कच्चे माल का आयात बंद होने से यह असर पड़ा है।
चीन में फैले कोरोना वायरस ने भारत के फार्मा उद्योग को अपनी चपेट में ले लिया है। वायरस के प्रकोप के बाद से चीन से दवाओं के कच्चे माल की सप्लाई बंद चल रही है। भारत में थोक दवाओं के कुल आयात में चीन की हिस्सेदारी लगभग 70 फीसदी है। दवा निर्माता आशंका जता रहे हैं कि जल्द चीन से कच्चा माल नहीं आया तो उत्पादन पर संकट हो सकता है। इन दिनों उद्योग पहले से रखे हुए कच्चे माल से ही काम चला रहे हैं। कच्चे माल की कमी के कारण ही अब इनके दामों में काफी इजाफा हो गया है। रॉ मैटेरियल का मूल्य बढ़ने से दवाएं भी महंगी हो जाएंगी।
प्लास्टिक से लेकर गत्ते तक के दाम बढ़े
दवाओं के दामों में बढ़ोतरी का कारण सिर्फ कच्चे माल के दाम बढ़ना ही नहीं है, बल्कि प्लास्टिक से लेकर गत्ते तक के दाम में इजाफा हो गया है। दिसंबर तक 800 रुपये में मिलने वाली प्लास्टिक के दाम अब 1600 हो गए हैं। इसके अलावा खाली गत्ता भी आठ-नौ रुपये की जगह 15-16 हो गया है।
दवा पहले अब
पैरासीटामोल 240 650
डाइक्लोफेनिक 550 700
मिलाइल क्लोबामाइन 230 330
नीमोस्लाइड 450 1350
क्लोरोक्वीन फास्फेट 1000 3000
हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन 5000 90000
एजिथ्रोमाइसिन 7650 10500
दवाओं के कच्चे माल फिर महंगा हो गया है। सबसे ज्यादा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन, पैरासीटामोल, क्लोरोक्वीन फास्फेट के रॉ मैटेरियल में वृद्धि हुई है। चीन से आयात बंद होने के कारण मार्केट में कच्चे माल की कमी के कारण मूल्य में इजाफा हुआ है। - नितिन मोदी, सचिव, केमिस्ट एसोसिएशन झांसी।