सरकारी और गैर सरकारी अस्पतालों में अग्निशमन इंतजाम की जांच करने के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश को अधिकारियों ने अनसुना कर दिया है। पांच दिन बीतने के बावजूद जांच शुरू होना तो दूर, कोई रणनीति तक नहीं बन सकी है। यह घोर लापरवाही का बड़ा उदाहरण है।
गौरतलब है कि एशिया के सबसे बड़े अस्पतालों में शुमार केजीएमयू के ट्रामा सेंटर में बीते 15 जुलाई को देर रात आग लग जाने के बाद 14 लोगों की मौत हो गई थी। इसके ठीक एक दिन बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सभी सरकारी और गैर सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा के इंतजाम की जांच के निर्देश दिए थे। सीएम के फरमान के बाद स्वास्थ्य और अग्निशमन विभाग ने नर्सिंग होम की जांच करवाने की बात कही थी। मगर ‘सरकार’ के आदेशों को पांच दिन बीत चुके हैं और किसी भी जिम्मेदार ने इसको गंभीरता से नहीं लिया है। अभी तक जांच ही नहीं शुरू की।
ज्यादातर में मानक और नियमों की अनदेखी
स्वास्थ्य और अग्निशमन विभाग की लापरवाही मरीजों की जान पर भारी पड़ सकती है। दरअसल, महानगर में अधिकतर नर्सिंग होम आवासीय नक्शे पर तने हुए हैं। आवासीय में व्यवसायिक का इस्तेमाल हो रहा है। नक्शा आवासीय होने के कारण अग्निशमन विभाग से अस्पतालों को एनओसी तक नहीं मिली है। स्पष्ट है कि नर्सिंग होम प्रबंधन ने मानकों को दरकिनार कर मरीजों की जान को ‘आग’ के हवाले कर दिया गया है, क्योंकि कइयों के यहां अग्निशमन यंत्र नहीं हैं। इनमें तो कुछ नर्सिंग होम ऐसे हैं, जो ट्रांसफार्मर से चंद कदमों की दूरी पर बने हैं। यदि ट्रांसफार्मर में आग लगती है, तो अस्पताल भी इसकी चपेट में आ सकता है।
बोले जिम्मेदार
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हर हाल में सोमवार से जांच
अब हर हाल में सोमवार से नर्सिंग होम की जांच शुरू की जाएगी। सरकारी और निजी नर्सिंग होम में सुरक्षा इंतजाम देखे जाएंगे। कमी मिलने पर प्रशासन को रिपोर्ट दी जाएगी। - महावीर सिंह, मुख्य अग्निशमन अधिकारी।
मंगलवार के बाद जांच तय
व्यस्तता के कारण अभी जांच शुरू नहीं हो सकी है। जल्द ही जिलाधिकारी के साथ बैठक कर इस मामले में चर्चा की जाएगी। मंगलवार के बाद नर्सिंग होमों की जांच तय है। - डॉ. सुरेश सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी।