झांसी। परिवार कल्याण महानिदेशक डॉ. एमआर मलिक ने कहा कि प्रसवोत्तर अंतर्गर्भाशयी गर्भ निरोधक डिवाइस (पीपीआईयूसीडी) लगाने के मामले में झांसी मेडिकल कॉलेज जब प्रदेश में टॉप कर सकता है, तो महिला अस्पताल क्यों पिछड़ा है। जबकि, दोनों अस्पतालों में प्रसवों की संख्या लगभग समान है। वह सीएमओ कार्यालय में झांसी मंडल में चल रहीं परिवार कल्याण योजनाओं की समीक्षा कर रहे थे।
महानिदेशक ने कहा कि सत्र 2014-15 में नसबंदी में झांसी का दूसरा स्थान था, जबकि वर्ष 2015-16 में जनपद पांचवें स्थान पर खिसक गया। इस बार दो हजार नसबंदी कम हुई, ऐसा क्यों? इस पर सीएमओ डॉ. विनोद कुमार यादव ने उन्हें बताया कि इस बार क्वालिटी पर विशेष जोर दिया गया है। एक कैंप में चिकित्सक से तीस ही केस कराए गए। हीमोग्लोबिन आदि कम होने पर मरीजों की नसबंदी नहीं की गई। सीएमओ के जवाब से वह संतुष्ट हो गए।
वहीं, मंडल के मंडलीय परियोजना प्रबंधक आनंद चौबे ने प्रस्तुतीकरण से बताया कि परिवार कल्याण सेवाओं में झांसी मंडल प्रदेश में प्रथम स्थान पर है। जनपदवार समीक्षा में संज्ञान में लाया गया कि बंध्याकरण सेवा में प्रदेश में ललितपुर पहले, झांसी पांचवें, जालौन बारहवें स्थान पर है। इसी प्रकार पीपीआईयूसीडी सेवा में झांसी मंडल प्रदेश में पहले स्थान पर है, जबकि झांसी चौथे पर। वहीं, महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज प्रदेश में प्रथम स्थान पर है।
हौसला साझेदारी की समीक्षा के दौरान संज्ञान में लाया गया कि झांसी में दस निजी चिकित्सालयों को अनुबंधित किया गया है तथा उनमें होने वाले नसबंदी केसों का भुगतान नियमित किया जा रहा है। इसी के तहत पांच लाभार्थियों को चेक वितरण महानिदेशक ने किया। निदेशक डॉ. सविता दुबे ने पीसीपीएनडीटी की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि झांसी मंडल में अल्ट्रासाउंड केंद्रों के नियमित निरीक्षण बहुत कम हैं। जिसे बढ़ाया जाना चाहिए।
झांसी का लिंग अनुपात 851 है, इस पर भी अधिक ध्यान देने की जरूरत है। महाप्रबंधक डॉ. पंकज सक्सेना ने परिवार कल्याण इंडेमनिटी स्कीम पर प्रकाश डाला। सभी सीएमओ को बताया गया कि फिक्सड डे सर्विसेस में मानक अनुसार सेवाएं देने के लिए दिशा-निर्देश सभी प्रभारियों को दिए जाएं।
बैठक में संयुक्त निदेशक डॉ. वीएस तोमर, मंडलीय अपर निदेशक डॉ. आरके टंडन समेत मंडल के सीएमओ, एसीएमओ, डीपीएमयू यूनिट, एचएलएफपीपीटी, जपांइगों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।