अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 50 सीटों पर खतरा बना हुआ है। क्योंकि, नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) की टीम कभी भी कॉलेज का निरीक्षण करने आ सकती है। दूसरी तरफ, पांच साल पहले बढ़ी हुईं 50 सीटों की मान्यता के लिए कॉलेज अब तक मानक पूरे नहीं कर पाया है।
मेडिकल कॉलेज में मौजूदा समय में एमबीबीएस की 150 सीटें हैं। इनमें से सौ सीटों को नेशनल मेडिकल काउंसिल से मान्यता मिल चुकी है। जबकि, एमबीबीएस की 50 सीटें 2019 में इस शर्त के साथ बढ़ाई गई थीं कि कॉलेज प्रशासन सभी मानकों को पूरा कर लेगा। ये सभी मानक पांच साल में पूरे करने थे। इस साल समय सीमा पूरी हो रही है। एनएमसी के मानकों के मुताबिक कॉलेज में चिकित्सा शिक्षकों की बायोमेट्रिक उपस्थिति कम से कम 75 फीसदी होनी चाहिए। जो कि 50 फीसदी भी नहीं है। पहले दिसंबर 2023 और फिर जनवरी 2024 में एनएमसी कॉलेज प्रशासन से इस मामले में जवाब तलब भी कर चुकी है। वहीं, कॉलेज में पदों के सापेक्ष कम से कम 90 फीसदी डॉक्टरों की तैनाती होनी चाहिए। मौजूदा समय में कॉलेज में करीब 35 फीसदी डॉक्टरों के पद रिक्त हैं। जबकि, एनएमसी की टीम कभी भी मानकों के सत्यापन के लिए कॉलेज प्रशासन का निरीक्षण करने के लिए झांसी आ सकती है। ऐसे में एमबीबीएस की बढ़ी हुई 50 सीटों पर खतरा है। अगर मानक पूरे नहीं होते हैं तो एनएमसी इन सीटों को मान्यता देने से इंकार कर सकती है।
ये मानक भी नहीं हैं पूरे
- डेढ़ सौ विद्यार्थियों की क्षमता वाला एक भी लेक्चर थिएटर नहीं।
- हॉस्टल की भी कमी है। पैरामेडिकल कॉलेज में छात्र रहते हैं।
- लाइब्रेरी में किताबों की भी कमी है। छात्रों की बैठने की क्षमता भी कम है।
वर्जन..
लगातार चिकित्सा शिक्षकों की नियुक्तियां हो रही हैं। उपकरण भी खरीदे जा रहे हैं। लाइब्रेरी, हॉस्टल का भी काम चल रहा है। मशीन की समस्या के चलते बायोमेट्रिक उपस्थिति कभी लगती नहीं है। एनएमसी को भी अवगत करा दिया गया है। बढ़ी हुई सीटों की मान्यता पर कोई खतरा नहीं है। - डॉ. एनएस सेंगर, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।