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अनुशासित रहकर काम करने से प्रोफेशन में लग जाते चार चांद

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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में मेडिकल एथिक्स पर हुई सेमिनार में डीएम आंद्रा वामसी ने डॉक्टरों, कर्मचारियों से कहा कि अनुशासित रहकर काम करने से प्रोफेशन में चार चांद लग जाते हैं। यदि कोई काम न हो तो धरना-प्रदर्शन नहीं करना चाहिए। अनुशासन के दायरे में रहकर ही काम करना चाहिए।
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ऑडिटोरियम में हुए सेमिनार में उप प्राचार्य डॉ एनएस सेंगर ने कहा कि कोरोना महामारी के दौर में डॉक्टर, कर्मचारियों को अपना पूरा योगदान देना चाहिए। यह कोई न कहे कि वह ये नहीं कर सकता या फिर यह ही करेगा। जिसको जो भी जिम्मेदारी दी जा रही है, उसका पूरा पालन करे। काम को भार समझकर नहीं, बल्कि पूरे मनोयोग से करेंगे तो सब कुछ अच्छा लगने लगेगा। डॉ मनीष जैन ने इलाज के दौरान जरूरी चार एथिक्स के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि मरीज को आजादी है कि पहले वो
सोचे फिर एक्ट करे और इलाज करने की अनुमति दे। दूसरा कि मरीजों के साथ भेदभाव न करें, तीसरा कि जो भी काम करें, उसका उद्देश्य लाभ पहुंचाना हो और चौथा कि ऐसा कोई काम न करें, जिसमें नुकसान होने की संभावना हो। डॉ रामबाबू ने कहा कि जूनियर डॉक्टर वरिष्ठ चिकित्सकों को अपना रोल मॉडल मानें और हर समय उनसे सीखने की प्रेरणा लें। इस दौरान मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ साधना कौशिक, डीन एकेडमिक डॉ संजया शर्मा, डॉ अमित सहगल, डॉ छवि सहगल, डॉ पारस गुप्ता, डॉ पंकज सोनकिया, डॉ जकी सिद्दीकी, डॉ अंशुल जैन मौजूद रहे।
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