महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज में रविवार को मरीज के कटे पैर को उसके सिर के नीचे रखने के मामले को शासन ने गंभीरता से लिया है। शासन ने कालेज की प्राचार्य से पूरे प्रकरण की रिपोर्ट तलब करते हुए प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए चार कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। साथ ही शासन स्तर पर जांच भी बैठा दी गई है।
प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा रजनीश दुबे ने बताया कि जिस समय ये घटना हुई उस दौरान ड्यूटी पर तैनात इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर, सीनियर रेजीडेंट, सिस्टर इंजार्ज को निलंबित करने के निर्देश दिए गए हैं। डॉक्टर ऑन कॉल के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन के निर्देश पर हुई है। मुख्य सचिव राजीव कुमार ने बताया कि इस मामले में जांच बैठा दी गई है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा इस मामले पर नजर रखे हुए हैं। महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. के के गुप्ता ने बताया कि झांसी मेडिकल कॉलेज की प्रधानाचार्य से पूरी रिपोर्ट मांगी गई है। इस बीच पता चला है कि परिवारीजन मरीज को कटे हुए पैर केे साथ लेकर लेकर चले गए हैं। बीएचटी (बेड हेड टिकट) पर उन्होंने लिखकर दिया है कि वह अपनी मर्जी से मरीज को ले जा रहे हैं।
इलाज न करने का आरोप
घायल घनश्याम को इलाज के लिए शनिवार की शाम एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उसके बहनोई जानकी शरण का आरोप है कि मेडिकल कालेज में चिकित्सक उपचार नहीं कर रहे थे। इससे परेशान होकर प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं, मेडिकल कालेज की प्राचार्य डा. साधना कौशिक का कहना है कि इलाज में किसी तरह की कोई कोताही नहीं बरती जा रही थी। परिजन अपनी स्वेच्छा से प्राइवेट में इलाज कराने के लिए ले गए हैं।
बचाव में उतरीं प्रधानाचार्य
मेडिकल कालेज में लापरवाही की पराकाष्ठता सामने आने के बाद भी प्रधानाचार्य डा. साधना कौशिक दोषी कर्मचारियों का बचाव करती नजर आईं। उन्होंने जिलाधिकारी को बताया कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने जानबूझकर मरीज का पैर उसके सिर के नीचे रखकर फोटो खींचकर वायरल कर दी। प्रधानाचार्य ने कहा कि यह कृत्य मेडिकल कालेज की छवि धूमिल करने के लिए किया गया।
डीएम ने भी बनाई जांच कमेटी
मेडिकल कालेज प्रकरण की जांच के लिए जिलाधिकारी शिवसहाय अवस्थी ने दो सदस्यीय जांच कमेटी बनाई है, जिसमें नगर मजिस्ट्रेट सीपी तिवारी और सीएमओ डा. सुरेश सिंह को शामिल किया गया है। कमेटी से तीन दिन में रिपोर्ट मांगी है। वहीं मेडिकल कालेज प्रशासन ने भी पांच सदस्यीय जांच कमेटी बनाई है, जिसमें पूर्व प्रधानाचार्य डा. एनएस सेंगर, डा. राजीव सिन्हा, डा. सुधीर कुमार, डा. सौरभ अग्रवाल और डा. दिनेश राजपूत को रखा गया है।