अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज की लाइब्रेरी के लिए छह साल से नई किताबें नहीं खरीदी गई हैं। यहां रखीं पुरानी किताबों से ही चिकित्सा छात्रा और जूनियर रेजिडेंट पढ़ाई कर रहे हैं। जबकि चिकित्सा विज्ञान में लगातार बदलाव होता रहता है। ऐसे में नई पुस्तकों से आधुनिक जानकारियां मिलती हैं।
जानकारों का कहना है कि हर साल नए उपचार, नए निदान मानदंड, नई दवाओं के अपडेट, अंतरराष्ट्रीय गाइडलाइन, नवीनतम साक्ष्य आधारित चिकित्सा जारी होते रहते हैं। नए संस्करण की किताबों में ये अपडेट होते हैं। नीट पीजी में हालिया अपडेट का महत्व होता है। जब कॉलेज की लाइब्रेरी में नई किताबें ही नहीं होती हैं तो छात्रों को इन्हीं आधुनिक विषयों की तैयारी में कठिनाई होती है। मेडिकल कॉलेज में अंतिम बार वर्ष 2018 में लाइब्रेरी के लिए पुस्तकें खरीदी गई थीं। जबकि, भावी डॉक्टरों का ज्ञानवर्धन करने के लिए किताबों का अहम योगदान होता है। अब 2025 समाप्त होने जा रहा है मगर यहां नई पुस्तकें नहीं आई हैं। इस मामले में कॉलेज के प्रमुख अधीक्षक डॉ. सचिन माहुर का कहना है कि पिछले साल जर्नल्स यानी पत्रिकाओं की खरीद की गई थी। इस साल किताबों की खरीद के लिए नौ लाख रुपये बजट मिला है। सभी विभागों से किताबों के संबंध में प्रस्ताव मांगा गया है। प्रस्ताव प्राप्त होते ही नई पुस्तकें खरीदी जाएंगी।