एजिलास्टिन का कंपनी ने अपनी लैब में पहले चरण का ट्रायल जानवरों पर किया है, इसमें सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। मेडिकल कॉलेज के ट्रायल प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर डॉ. जकी सिद्दीकी ने बताया कि अब पहली बार इस स्प्रे का ट्रायल मरीजों पर शुरू होने जा रहा है।
शरीर में कोरोना का वायरस नष्ट करने वाले नेजल स्प्रे एजिलास्टिन का जल्द ही झांसी में ट्रायल शुरू होगा। पहली बार मरीजों पर इस स्प्रे का इस्तेमाल किया जाएगा। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज की एथिकल कमेटी ने इसकी मंजूरी दे दी है।
विज्ञापन
एजिलास्टिन का कंपनी ने अपनी लैब में पहले चरण का ट्रायल जानवरों पर किया है, इसमें सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। मेडिकल कॉलेज के ट्रायल प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर डॉ. जकी सिद्दीकी ने बताया कि अब पहली बार इस स्प्रे का ट्रायल मरीजों पर शुरू होने जा रहा है। जिन मरीजों की कोरोना की रिपोर्ट पॉजिटिव आएगी और हल्के लक्षण होंगे, उनकी नाक में ये स्प्रे किया जाएगा। चूंकि, अधिकतर वायरस नाक के जरिए ही गले से होते हुए फेफड़े में पहुंचता है। ऐसे में स्प्रे होने के बाद कोरोना वायरस वहीं पर नष्ट हो जाएगा। ये स्प्रे शरीर में जाकर मरीज की प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है।
होम क्वारंटीन मरीजों पर होगा इस्तेमाल
डॉ. जकी ने बताया कि होम क्वारंटीन के दौरान कोविड के हल्के लक्षण वाले मरीजों पर नेजल स्प्रे एजिलास्टिन का उपयोग किया जाएगा। इसके लिए पहले कंपनी की ओर से मरीजों या उनके परिजनों से सहमति ली जाएगी। मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर मरीजों के लगातार संपर्क में रहेंगे।
विज्ञापन
तीन मरीजों को लगाया गया सेंथाक्विन सिट्रेट इंजेक्शन
मेडिकल कॉलेज में शॉक के मरीजों में इस्तेमाल होने वाले सेंथाक्विन सिट्रेट इंजेक्शन का भी ट्रायल शुरू हो गया है। अब तक तीन मरीजों को ये इंजेक्शन लगाया जा चुका है। डॉक्टरों के मुताबिक तीसरे चरण का ये ट्रायल पूरा होने में दो से तीन महीने लगेंगे। बताया कि दूसरे इंजेक्शनों की तुलना में सेंथाक्विन सिट्रेट इंजेक्शन 15 से 20 प्रतिशत तेजी से मरीजों की रिकवरी करता है। चौथे और अंतिम चरण का ये ट्रायल पूरा होने के बाद साफ हो जाएगा कि इस इंजेक्शन का कोई दुष्परिणाम है या नहीं। हालांकि, अब तक कोई साइड इफेक्ट सामने नहीं आया है।