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मेडिकल कॉलेज में खुलेगा थैलेसीमिया डे केयर सेंटर

Sun, 01 Jul 2018 01:09 AM IST
amarujala
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medical collage, jhansi news - फोटो : demo
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बुंदेलखंड के थैलेसीमिया रोगियों को अब बेहतर इलाज के लिए ग्वालियर, लखनऊ या दिल्ली जैसे बड़े महानगरों की तरफ रुख नहीं करना पड़ेगा। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में थैलेसीमिया डे केयर सेंटर की स्थापना जल्द होगी। यहां बच्चों को नि:शुल्क रक्त चढ़ाया जाएगा। साथ ही बार-बार रक्त चढ़ाने से शरीर में आयरन की अधिकता को रोकने वाली महंगी दवाइयां (चिलेशन थेरेपी) भी नि:शुल्क दी जाएंगी।
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थैलेसीमिया लाइलाज बीमारी है। इस बीमारी से हीमोग्लोबिन बनने की प्रक्रिया गड़बड़ाने लगती है। हीमोग्लोबिन अल्फाग्लोबिन और बीटाग्लोबिन प्रोटीन से बनता है। थैलेसीमिया इस प्रोटीन में ग्लोबिन निर्माण की प्रक्रिया में खराबी होने से होता है। इससे लाल रक्त कोशिकाएं तेजी से नष्ट हो जाती हैं। रक्त की भारी कमी के कारण रोगी के शरीर में बार-बार खून चढ़ाना पड़ता है। रक्त की कमी से हीमोग्लोबिन नहीं बन पाता है। माता-पिता दोनों के जींस में थैलेसीमिया होने से बच्चे को होने वाला रोग मेजर थैलेसीमिया होता है। वहीं, थैलेसीमिया माइनर उन बच्चों को होता है, जिन्हें प्रभावित जीन माता-पिता में से किन्हीं एक में होता है। थैलेसीमिया की पहचान तीन महीने की आयु के बाद ही हो पाती है। थैलेसीमिया प्रभावित रोगी की बोन मैरो रक्त की कमी की पूर्ति करने की कोशिश में फैलने लगती है, जिससे सिर और चेहरे की हड्डियां मोटी और चौड़ी हो जाती है। ऊपर के दांत बाहर की ओर निकल आते हैं। लीवर व प्लीहा आकार में काफी बड़े हो जाते हैं। डब्लूएचओ के मुताबिक भारत में लगभग डेढ़ लाख बच्चे थैलेसीमिया पीड़ित हैं। हर साल 10 से 12 हजार बच्चे इसमें जुड़ जाते हैं।  


थैलेसीमिया के लक्षण

- थकान व कमजोरी आना
- त्वचा का पीला रंग होना
- चेहरे की हड्डी की विकृति
- धीमी गति से विकास होना
- पेट में सूजन आना
- गहरा व गाढ़ा मूत्र होना

ऐसे करें रोकथाम
बच्चा थैलेसीमिया रोग के साथ पैदा ही न हो, इसके लिए शादी से पहले लड़के और लड़की की खून की जांच अनिवार्य कर देनी चाहिए। यदि शादी हो भी गई है तो गर्भावस्था के 8 से 11 सप्ताह में ही डीएनए जांच करा लेनी चाहिए। माइनर थैलेसीमिया से ग्रसित इंसान सामान्य जीवन जी पाता है और उसे आभास तक नहीं होता कि उसके खून में कोई दोष है। यदि शादी के पहले ही पति-पत्नी के खून की जांच हो जाए, तो काफी हद तक इस आनुवांशिक रोग से बच्चों को बचाया जा सकता है।
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बुंदेलखंड के मरीजों को होगा फायदा
मेडिकल कॉलेज में थैलेसीमिया डे केयर सेंटर की जल्द स्थापना होगी। इसके लिए शासन ने मंजूरी दे दी है।  सेंटर में ल्यूकोफिल्टर के जरिए शुद्ध रक्त मरीज को नि:शुल्क चढ़ाया जा सकेगा। बार-बार रक्त चढ़ाने से शरीर में आयरन की अधिकता को रोकने वाली चिलेशन थेरेपी भी नि:शुल्क की जाएगी। जांच और काउंसिलिंग की सुविधा भी होगी। सेंटर खुलने से बुंदेलखंड के मरीजों को बहुत फायदा होगा।
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- डॉ. ओमशंकर चौरसिया, बाल रोग विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज।
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