महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में अब किसी भी मरीज को बाहर से दवाएं खरीदनी नहीं पड़ेंगी। कॉलेज में साढ़े पांच करोड़ रुपये की दवाएं आ गई हैं। खास बात ये है कि अब हर वार्ड में 15-15 दिन की दवाओं का स्टॉक भी रखवाया जाएगा, ताकि रात में जरूरत पड़ने पर मरीज को अस्पताल से ही दवा मिल सके।
जनवरी में प्रदेश सरकार ने मेडिकल कॉलेज को दवाओं के लिए दस करोड़ रुपये का बजट दिया था। कुछ समय पहले मेडिकल कॉलेज ने दो करोड़ रुपये की दवाएं खरीदी थीं। अब फिर कॉलेज ने 292 प्रकार की साढ़े पांच करोड़ रुपये की दवाएं खरीदी हैं। इस बार की दवाओं में कई महंगे इंजेक्शन भी हैं, जो पहले कॉलेज प्रशासन कम बजट की वजह से नहीं खरीद पाता था। अब किसी भी मरीज को बाहर से दवा नहीं खरीदनी पड़ेंगी।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हरीशचंद्र आर्या ने बताया कि अब हर वार्ड में 15-15 दिन का दवाओं का स्टॉक उपलब्ध रहेगा। दवाओं की सूची डॉक्टर और सिस्टर के ड्यूटी रूम में चस्पा रहेगी। रिपोर्ट बुक के आधार पर मरीजों को दवाएं दी जाएंगी। सीएमएस ने बताया कि अभी तक दवा काउंटर पर मरीजों को शाम पांच बजे तक मिलती थीं। वार्ड में दवा रखवाने का मकसद यह है कि रात को जरूरत पड़ने पर मरीज को बाहर से दवाएं न खरीदनी पड़ें। उन्होंने कहा कि कोई भी डॉक्टर मरीजों को बाहर की दवा लिखता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।