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खसरा की दस्तक

Sun, 28 Jun 2015 12:14 AM IST
झांसी / ब्यूरो
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झांसी में एक बार फिर खसरे का खतरा मंडराने लगा है। पुरानी नझाई व पन्नालाल मुहल्ले में एक हफ्ते के दौरान कई घरों के बच्चे  खसरा की चपेट में आ गए हैं। एक घर से पास पड़ोस में खसरा फैलता जा रहा है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग को अब तक इसकी भनक भी नहीं लगी है।
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पुरानी नझाई, पन्नालाल मुहल्ले के एक दर्जन से अधिक छोटे-बड़े बच्चों को खतरा ने अपनी चपेट में ले लिया है। मुहल्ले की आरती गुप्ता के चेहरे पर तो खसरे के बड़े-बड़े निशान बन गए हैं। वहीं, कृष्णा, आयुष, आदित्य भी खसरे की बीमारी से ग्रसित हैं। मुहल्ले वालों ने बताया कि एक के बाद एक घरों के बच्चों को खसरा अपनी चपेट में लेता जा रहा है। बच्चे साथ खेलते-कूदते हैं, इसलिए इसका संक्रमण तेजी से फैल रहा है। अब तक स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मुहल्ले में दस्तक नहीं दी है, जिसको लेकर मुहल्ले वासियों में आक्रोश है।

सारे दावे फेल, टीकाकरण के बाद भी हुए शिकार
झांसी (ब्यूरो)। प्रदेश सरकार खसरा मुक्त बनाने को लेकर जोरशोर से अभियान चला रही है। जन्म के समय से ही बच्चों का टीकाकरण शुरू हो जाता है। बच्चों को मुख्य छह बीमारियों जैसे बीसीजी, पोलियो, डीपीटी, खसरा के टीके समय-समय पर लगवाए जाते हैं। लेकिन टीकाकरण के बावजूद खसरा बच्चों को अपनी चपेट में ले रहा है। पुरानी नझाई, पन्नालाल मुहल्ले में जो बच्चे खसरा का शिकार हुए हैं, उनमें से कई का टीकाकरण कार्ड भी बना हुआ है।
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टीकाकरण के नाम पर कमाई
झांसी। टीकाकरण के नाम पर प्राइवेट क्लीनिक जनता को लूट रहे हैं। जानकारों की मानें तो उनके द्वारा लगाई जा रही वैक्सीन बेअसर साबित हो रही हैं। इसका प्रमुख कारण वैक्सीन को सही तापमान में नहीं रखना है, जबकि सरकारी चिकित्सालयों में वैक्सीन को उचित तापमान में रखा जाता है। खसरे की वैक्सीन को दो से आठ डिग्री तापमान पर रखना चाहिए।

जुलाई से अक्तूबर के बीच संक्रमण ज्यादा
झांसी। आर्द्रता बढ़ने से खसरे का वाइरस तेजी से फैसला है। जुलाई से अक्तूबर खसरा के पांव पसारने का माकूल समय है। चिकित्सकों की मानें तो खसरे के बाद व्यक्ति को निमोनिया होने का खतरा बढ़ जाता है।

‘अभी इसकी जानकारी नहीं हो पाई है। रविवार को टीम मौके पर भेजी जाएगी। पता लगाया जाएगा कि बच्चों को वैक्सीन प्राइवेट अथवा सरकारी अस्पताल से लगवाई गईं हैं।’
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- डा. एनके जैन, जिला संक्रामक रोग अधिकारी
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