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श्रवण नक्षत्र में मनेगी मौनी अमावस्या, पितरों का पूजन होगा खास

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झांसी। माघ मास की मौनी अमावस्या श्रवण नक्षत्र में मनाई जाएगी। सूर्य, चंद्र, बुध और शनि मौनी अमावस्या के दौरान मकर राशि में रहेंगे। धार्मिक मान्यता के अंतर्गत मौनी अमावस्या पर गंगा में डुबकी लगाने के साथ ही पितरों का भी पूजन किया जाता है। इस दिन मौन व्रत धारण कर आध्यात्मिक ऊर्जा भी बढ़ाई जाती है।
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सनातन धर्म में माघ मास की अमावस्या का बड़ा महत्व है। गंगा एवं अन्य पवित्र नदियों में श्रद्धालु स्नान कर सूर्य को अर्घ्य देकर पितरों को नमन करते हैं। इसके उपरांत भगवान विष्णु को तिल अर्पण करते हैं। आचार्य शांतनु पांडेय के अनुसार अमावस्या की तिथि 31 जनवरी को दोपहर 2:18 बजे प्रारंभ हो जाएगी। इस दिन पूर्वजों का श्राद्ध और पूजन करने का विधान है। जबकि एक फरवरी को स्नान दान और देवताओं की पूजा की जाएगी। अमावस्या पर श्रवण नक्षत्र और चतुग्रही योग रहेगा। मकर राशि में सूर्य, चंद्रमा, बुध और शनि रहेंगे। मौनी अमावस्या पर संगम में स्नान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।
मौन व्रत से प्राप्त होता है मुनि पद
मौनी अमावस्या पर मौन व्रत धारण का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि मौन व्रत करने वाले व्यक्ति को मुनि पद की प्राप्ति होती है। शास्त्रों के अनुसार माघ अमावस्या पर पितरों को तर्पण करने से उन्हें मोक्ष प्राप्त होता है। माघ मास को कार्तिक के समान पुण्य मास कहा गया है।
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