मंगलवार को देवउठनी एकादशी के पूजन के साथ शादी का सीजन शुरू हो जाएगा। गल्री-बाजारों में शहनाइयां गूंजने लगेगी। हालांकि देवउठनी एकादशी पर विवाह मुहूर्त को लेकर संशय बना हुआ है, जिसका कारण इस दिन शुक्र और गुरु का अस्त होना माना जा रहा है। लेकिन धार्मिक विद्वानों के अनुसार देवोत्थान एकादशी की तिथि विवाह के लिए शुद्ध है। शादी सीजन में इस बार विवाह की तिथियां बहुत कम है। 15 दिसंबर तक सहालग रहेगी, उसके बाद चार फरवरी से ही शहनाइयां गूंजेंगी।
देवउठनी एकादशी को होने वाले विवाह संस्कारों के संबंध में आचार्य हरीओेम पाठक ने बताया कि गुरु, शुक्र, सूर्य, चंद्र का विचार अनिवार्य नहीं है। ऐेसे में यह तिथि विवाह के पूर्णत: शुद्ध है और बिना विचार किए विवाह करने की परंपरा है। पं. शांतनु पांडेय ने बताया कि इस बार सूर्य तुला राशि में है, विवाह मुहूर्त न होते हुए भी देवउठनी एकादशी पर विवाह किया जा सकता है। यह तिथि अक्षय तृतीया और भड़रया नवमी की तरह है। इस दिन बिना किसी विचार के विवाह शुभ रहता है।
इस वर्ष शादी सीजन में विवाह लग्न की तिथियां काफी कम है। जनवरी में तो मलमास के चलते कोई विवाह तिथि नहीं है। महंत विष्णु दत्त स्वामी के मुताबिक नवंबर में 20,23,29, दिसंबर में 3,410,11, फरवरी में 4,6,7,18 तिथियां विवाह लग्न के लिए शुभ है। उनके अनुसार 15 दिसंबर से मलमास शुरू हो जाएगा, जो 14 जनवरी तक रहेगा। इस दौरान शुक्र अस्त रहेगा। शुक्र के दो फरवरी पर उदय के बाद विवाह लग्न 4 फरवरी से फिर शुरू होंगे। 23 फरवरी क ो होलाष्टक लगने के बाद फिर विवाह की लग्न दो मार्च से शुरू होगी।
एकादशी को भगवान विष्णु का होगा जागरण
देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु क्षीरसागर में आराम करने चले जाते है, जिन्हें चार माह बाद देवोत्थान एकादशी पर जगाया जाता है। पूजा दिवस श्रद्धालु निर्जला व्रत रखते है। शाम को गन्ने का मंडप बनाकर भगवान विष्णु की पूजा कर उनका जागरण किया जाता है। इस दौरान उन्हें मौसमी सब्जियां, फल आदि भगवान को अर्पित किए जाते हैं।
50 से 80 रुपये में पांच गन्ने
महानगर में गन्ने की अस्थायी दुकानें जगह-जगह लग चुकी है। इनमें 50 से 80 रुपये में पांच गन्ने बिक रहे हैं। बड़ागांव गेट बाहर गन्ना बेच रहे राजाराम ने बताया कि सोमवार से बिक्री तेज होगी।