कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए लगाए गए लॉकडाउन से कारोबारियों को तगड़ा झटका लगा है। किराना, दूध व फल- सब्जी को छोड़ दिया जाए तो 57 दिन तक अन्य सभी कारोबार पूरी तरह से ठप रहे। इस अवधि में कारोबार पर ढाई अरब से ज्यादा का प्रभाव पड़ा। अगर बाजार खुले रहते तो यह पैसा बाजार में आता और व्यापार का पहिया घूमता रहता। नई शुरुआत करने में भी बड़े कारोबारी व छोटे दुकानदारों को भी दिक्कत आ रही है। लॉकडाउन में 25 मार्च से रियल इस्टेट, क्रशर, कंस्ट्रक्शन, इलेक्ट्रानिक गुड्स, मोबाइल, टायर, फर्नीचर, रेस्टोरेंट, होटल, रेडीमेड, इंडस्ट्री, इलेक्ट्रिक, कंप्यूटर हार्डवेयर, होटल सीमेंट, बालू, सरिया, गल्लामंडी, सोना- चांदी जैसे सभी प्रमुख कारोबार ठप रहे। इन धंधों से जुड़े कर्मचारी व मजदूर भी परेशान रहे। चूंकि, बुंदेलखंड के सभी प्रमुख जगहों छतरपुर, महोबा, मऊरानीपुर, गरौठा, गुरसराय, मोंठ, बरुआसागर, चिरगांव आदि कस्बों के व्यापारी सीधे झांसी के थोक व्यापारियों से जुड़े हैं। प्रतिदिन पांच करोड़ से ज्यादा का माल इधर- उधर होता है। माल की मांग इतनी अधिक रहती है कि बड़े कारोबारियों को कंपनी तक एडवांस पैसा जमा कर ऑर्डर बुक कराना पड़ता है। 25 मार्च को एकदम लॉकडाउन की खबर आने के बाद कारोबारियों का एडवांस फंस गया तो प्रतिष्ठान बंद होेने से बिक्री भी बंद हो गई। गर्मी और शादियों का पीक सीजन भी हाथ से चला गया। लॉकडाउन के चौथे चरण में अधिकांश कारोबारियों को दिन के हिसाब से व्यापार चलाने की अनुमति दी गई, लेकिन नए सिरे से काम शुरू करने में अभी उनको परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दूसरे शहरों से वे अभी माल भी नहीं मंगा पा रहे हैं। लॉकडाउन ने व्यापार की कमर तोड़ दी है। दिल्ली से माल भी नहीं आ रहा पा रहा है। उधारी भी फंसी है। पैसे का आना- जाना भी रुक गया। आगे भी दुकानदारी करने में दिक्कत आएगी। अमित गोदवानी, रेडीमेड कपड़ा व्यापारी। मोबाइल का 90 फीसदी बाजार चीन के बाजार पर निर्भर है। उनके व्यापार तो जनवरी से असर पड़ना शुरू हो गया था। लॉकडाउन ने व्यापार और पीछे धकेल दिया। संजू तिवारी, मोबाइल विक्रेता। मेरे कारोबार का तो पूरा पीक सीजन चला गया। शादियों व ईद का लाभ भी नहीं मिल सका। लॉकडाउन में स्टाफ का वेतन व अन्य खर्चे भी वहन करने पड़े। हर तरफ से नुकसान हुआ। अमन गुप्ता, फुटवियर कारोबारी। होटल व्यवसाय तो अभी तक नहीं खोला गया है। कब तक खुलेगा, यह भी नहीं पता। जबकि स्टाफ, बिजली, पानी, टैक्स व अन्य खर्चे बराबर वहन करने पड़ रहे हैं। चौधरी साहिल, होटल व्यवसायी।