अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बुंदेलखंड में एपीडर्मोफाइटोन फ्लो क्यूसम फंगल संक्रमण के ज्यादा रोगी मिल रहे हैं। इसका पता रोगियों को तब हो रहा है, जब शरीर में फैल रहा है। यह संक्रमण एक-दूसरे में तेजी से फैलता है। इसलिए एक ही परिवार के कई लोगों को हो रहा है।
त्वचा रोग विभागाध्यक्ष डॉ. नीरज श्रीवास्तव ने बताया कि त्वचा रोग विभाग में फंगल संक्रमण के रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। रोगियों ने बताया कि शुरुआत में इसका पता नहीं चला। जब तेज खुजली के साथ चकत्ते आदि हुए, तब पता चला। एक ही परिवार के कई लोगों में इसकी शिकायत मिली। इस पर 150 रोगियों की त्वचा के सैंपल बीयू की माइक्रोबायलॉजी लैब में जांच के लिए भेजे गए। जांच में पता चला कि 40 फीसदी से ज्यादा रोगियों में एपीडर्मोफाइटोन फ्लो क्यूसम फंगल का संक्रमण है।
चिकित्सक ने बताया कि यह संक्रमण चादर, तौलिया, हाथ मिलाने आदि से फैलता है, इसलिए परिवार के कई सदस्यों को हो जाता है। यदि उपचार में लापरवाही होती है, तो यह पूरे शरीर में भी फैल जाता है। उन्होंने बताया कि त्वचा रोग विभाग की ओपीडी में रोजाना 450 से ज्यादा रोगी उपचार के लिए आ रहे हैं, जिनमें से करीब 300 इस फंगल के रोगी मिल रहे हैं।