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मनरेगा से जल रहे सवा तीन लाख घरों के चूल्हे

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manrega
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झांसी। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) बुंदेलखंड के मजदूरों के लिए जीवनदायिनी साबित हुई है। जी हां, क्षेत्र के तीन लाख तैंतीस हजार मजदूरों के घरों का चूल्हा मनरेगा से मिलने वाली दिहाड़ी से जल रहा है। योजना के तहत अभी हाल ही में देश के महानगरों से लौटे प्रवासी श्रमिकों को भी काम उपलब्ध कराया गया है। इसका दायरा और भी बढ़ाने की तैयारी है।
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लॉकडाउन की वजह से कारोबार और रोजगार बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। निर्माण कार्य व अन्य कामधंधे बंद होने की वजह से मजदूरों के हाथों से काम छिन गया था। उनके सामने रोजी - रोटी का संकट बड़ी चुनौती बनकर खड़ा हो गया था। लेकिन, ऐसे वक्त पर मनरेगा बड़ी राहत बनकर उभरी है। खाली हाथों को काम उपलब्ध कराने का ये बड़ा हथियार साबित हुई।
बुंदेलखंड क्षेत्र के झांसी और चित्रकूट मंडल के सातों जनपदों में मनरेगा के तहत 9,953 कार्य किए जा रहे हैं। इनमें 3,33,580 मजदूरों को रोजगार दिया गया है। इसमें बड़ी संख्या उन मजदूरों की भी है, जो लॉकडाउन की अवधि के दौरान देश के महानगरों से वापस अपने गांव की ओर लौटे हैं। 62,784 प्रवासी श्रमिकों को अब तक मनरेगा के तहत रोजगार उपलब्ध कराया जा चुका है। सरकार की ज्यादा से ज्यादा मजदूरों को मनरेगा के तहत काम मुहैया कराने की तैयारी है।
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जनपदवार ये है स्थिति -
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जनपद जारी कार्य नियोजित मजदूर प्रवासी मजदूर
चित्रकूट 1,087 45,251 3,315
हमीरपुर 1,182 43,705 9,300
महोबा 585 23,228 5,232
बांदा 2,432 50,665 16,300
झांसी 1,411 52,559 11,870
ललितपुर 1,953 59,695 9,335
जालौन 1,303 58,477 7,432
201 रुपये रोजाना मिलती है मजदूरी
झांसी। मनरेगा के तहत पहले 182 रुपये प्रतिदिन मजदूरी प्रदान की जाती थी, परंतु लॉकडाउन की अवधि के दौरान इसे बढ़ाकर 201 रुपये प्रतिदिन कर दिया गया है। महिला और पुरुष, सभी श्रमिकों की मजदूरी समान है। श्रमिकों के पहले ग्राम पंचायत स्तर पर जॉब कार्ड बनाए जाते हैं और श्रमिकों के बैंक खाते में उनका पारिश्रमिक भेजा जाता है।
ये दिए जाते हैं काम
झांसी। मनरेगा श्रमिकों से गांवों में तालाबों के गहरीकरण के लिए खुदाई का काम दिया जाता है। इसके अलावा चेकडैम निर्माण, खुदाई, खड़ंजा बिछाना, खेतों की मेढ़ तैयार करना तथा प्रधानमंत्री आवासों के निर्माण में भी मनरेगा श्रमिकों को लगाया जाता है।
मनरेगा के तहत अधिक से अधिक श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। गांवों में इसका असर नजर भी आने लगा है। प्रवासी श्रमिकों को भी लगातार इस योजना से जोड़ा जा रहा है।
- सुभाष चंद्र शर्मा, मंडलायुक्त - झांसी मंडल
रोजगार उपलब्ध कराने में मनरेगा कारगर साबित हुई है। सरकार की ओर से भी इस योजना को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। काम के साथ-साथ इस योजना में मजदूरों की संख्या भी लगातार बढ़ाई जा रही है।
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- गौरव दयाल, मंडलायुक्त - चित्रकूट मंडल
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