झांसी। मजदूरों को सौ दिन का काम और रोजगार की गारंटी देने वाली मनरेगा योजना की बुंदेलखंड में हवा निकल गई है। सरकार के पास मनरेगा मजदूरों को मजदूरी देने के लिए पैसा ही नहीं है। बुंदेलखंड के मजदूरों का सवा तीन करोड़ रुपये बकाया है। जबकि सामग्री का चार करोड़ रुपये अब तक नहीं मिल सका है। बीते तीन महीने से मजदूरी का भुगतान नहीं होने से मजदूर योजना से दूर भाग रहे हैं। जबकि सामग्री के लिए बजट नहीं मिलने से सामग्री सप्लायरों ने सामान देने से मना कर दिया है। आलम यह है कि क्षेत्र में मनरेगा के तहत काम की रफ्तार धीमी हो गई है।
झांसी में मनरेगा योजना के तहत करीब 500 काम चल रहे हैं। जिन्हें रोज 15 हजार मजदूरों से कराया जा रहा है। लेकिन मजदूरों को मजदूरी नहीं मिल सकी है। 182 रुपये प्रतिदिन की दर से मिलने वाली मजदूरी का तीन महीने से भुगतान नहीं किया गया है। ऐसे में जिले में मजदूरी का ढाई करोड़ रुपये बकाया हो गया है। होली का त्योहार नजदीक आते ही मजदूरों की उलझन बढ़ गई है। इसके साथ ही ललितपुर में काम कर रहे 71 हजार मनरेगा मजदूरों को दो महीने से मजदूरी नहीं मिली है। जिले में 63 लाख रुपये बकाया चल रहे हैं। इसके चलते मजदूर काम छोड़कर भाग रहे हैं।
सामग्री का बकाया बन रहा मुसीबत
जिले में मनरेगा के तहत पांच महीने से सामग्री के लिए बजट नहीं मिला है। सामग्री का करीब चार करोड़ रुपये बकाया होने से अब काम में अड़चन आ रही है। आलम यह है कि सामग्री मुहैया कराने वाली फर्मों ने मनरेगा कार्यों के लिए सामान देने से मना कर दिया है। एक-एक फर्म के लाखों रुपये अटके हैं।
98 हजार हैं सक्रिय मजदूर
झांसी में मनरेगा के तहत साढ़े तीन लाख मजदूर पंजीकृ़त हैं। इसके सापेक्ष मौजूदा वित्तीय वर्ष में करीब 98 हजार मजदूर सक्रिय हैं। रोज काम कर रहे मजदूर मजदूरी का भुगतान नहीं होने से शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं।
निर्देशों की निकल गई हवा
सरकार ने बीते दिनों कैबिनेट बैठक में मनरेगा मजदूरों को 15 दिन में मजदूरी देने का प्रस्ताव पास किया था। 15 दिन में मजदूरी न मिलने पर अधिकारियों पर आर्थिक दंड लगाने का निर्णय लिया गया था। लेकिन कैबिनेट प्रस्ताव पास होने के बाद से अब तक मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया।
जिले में मनरेगा मजदूरों की मजदूरी अटकी हुई है। शासन स्तर पर मजदूरों के बिल वाउचर भेजे जा चुके हैं। सामग्री का भी बजट नहीं मिल सका है। जल्द भुगतान कराने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है।
रामौतार सिंह, डीसी मनरेगा