झांसी। केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए अध्यादेश में मंडी शुल्क को घटा दिया गया है। इसके अलावा किसान व व्यापारी को मंडी परिसर के बाहर भी सब्जी, फल, गेहूं, चना व अन्य खाद्यानों को बेचने की इजाजत दी गई है। जिसके चलते मंडी समिति को दो माह में ही एक करोड़, अठारह लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। जबकि, पिछले वर्ष जून माह में एक करोड़ ग्यारह लाख व जुलाई महीने में छियत्तर लाख, पचास हजार रुपए मंडी शुल्क के रूप में वसूले गए थे।
किसानों द्वारा सब्जियों, फलों, गेहूं, चावल, मूंगफली, चना व अन्य खाद्यानों को मंडी के अंदर ही बेचने का नियम था। जिसके एवज में किसानों व व्यापारियों द्वारा मंडी समिति को ढाई फीसदी मंडी शुल्क अदा किया जाता था। सरकार द्वारा पांच जून दो हजार बीस को एक अध्यादेश लागू किया गया था। जिसके तहत मंडी शुल्क को घटाकर एक फीसदी कर दिया गया है। इसके अलावा किसान व व्यापारी अपनी मर्जी के अनुसार मंडी के बाहर भी बिक्री करने का नियम तय कर दिया गया है। जिसके चलते अब किसानों व व्यापारियों द्वारा मंडी में न लाकर अब बाहर ही बिक्री की जाने लगी है। जिसके चलते मंडी शुल्क में कटौती होने लगी है। मंडी समिति को जून व जुलाई माह में पिछले वर्ष की अपेक्षा एक करोड़ अठारह लाख का नुकसान झेलना पड़ा है।
इस संबंध में मंडी समिति के सचिव पंकज शर्मा ने बताया कि सरकार लागू किए गए नए अध्यादेश के कारण अधिकतर व्यापारियों द्वारा मंडी परिसर के बाहर ही खाद्यानों को बेचा जा रहा है। जिसके चलते मंडी समिति के शुल्क में दो माह में एक करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है।