झांसी वो पावन भूमि है, जिसने महारानी लक्ष्मीबाई का शौर्य देखा। यहीं से महिला रेसलर तैयार करने की ख्वाहिश है। बशर्ते स्थानीय प्रशासन या फिर राज्य सरकार से मदद मिले। यह बात पहली महिला अंतरराष्ट्रीय रेसलर बीबी बुलबुल ने अमर उजाला से बात करते हुई कही।
उन्होंने कहा कि वह भारत की पहली महिला फाइटर हैं। बचपन से ही टीवी पर देखकर रेसलिंग के दांव-पेच सीखे और धीरे-धीरे इसकी ट्रेनिंग लेनी शुरू कर दी। उन्होंने सबसे पहली फाइट पांच साल पहले खेली थी। हल्द्वानी में हुई अंतरराष्ट्रीय रेसलिंग में वह विदेशी खिलाड़ी को ढेर कर चैंपियन बनी थीं। इसके बाद उन्होंने दुबई, ऑस्ट्रेलिया, चाइना और बैंकाक में हुई प्रतियोगिता में हिस्सा लिया।
उनकी चाह है कि उनकी अगली फाइट यूएसए में हो। उन्होंने खेल में महिला खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया और कहा कि वह लोग घर के कामकाज को छोड़कर देश का नाम रोशन करने में अपना योगदान दें। उन्होंने बताया कि भारत में अभी तक कुल 15 महिला खिलाड़ी हैं, जो इस खेल में आईं हैं। कहा कि रेसलिंग करना हर किसी के बस की बात नहीं है। इसमें अन्य खेल के मुकाबले कई गुना अधिक शारीरिक क्षमता होने की जरूरत है।