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बबीना से बसई के बीच बिछी तीसरी रेल लाइन, ट्रेनों की लेटलतीफी पर लगेगा विराम

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jhansi bina third line - फोटो : demo
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झांसी से ललितपुर के बीच तीसरी लाइन बिछाने का काम तेजी से चल रहा है। पहले चरण में बबीना से बसई के बीच लगभग 13 किलोमीटर तक काम पूरा कर लिया गया है। रास्ते में पड़ने वाले 17 छोटे व एक बड़े पुल का निर्माण हो गया है। तीन सबवे (पटरियों के नीचे से निकलने वाले छोटे रास्ते) बनाए गए हैं। एक साल पहले तीसरी रेल लाइन बिछाने का काम शुरू किया गया था।
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झांसी-बीना के मध्य तीसरी रेल लाइन का काम पांच चरणों में पूरा होना है। यह काम बीना से धौर्रा, धौर्रा से ललितपुर, ललितपुर से दैलवारा, बसई से बबीना और बबीना से झांसी के बीच बांटा गया है। इस साल के शुरूआत में बसई से बबीना (13 किलोमीटर) सेक्शन के बीच तीसरी रेल लाइन डालने का काम शुरू किया गया था।

इस काम को मार्च 2019 में पूरा होना है। मगर, इसके पहले ही पहले चरण का काम लगभग पूरा कर लिया गया है। इसमें बबीना, बुढ़पुरा और बसई स्टेशन पर तीसरी और चौथी रेल लाइन के हिसाब से नई बिल्डिंग बनाई गई है। तीसरी रेल लाइन चालू होने पर नई बिल्डिंग से ही स्टेशन का संचालन होगा।
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बबीना में ब्रिटिश काल की बनी बिल्डिंग की जगह नई जगह से प्रवेश द्वार हो जाएगा। सैन्य क्षेत्र होने से बबीना बेहद अहम स्टेशन माना जाता है। रेलवे ने अभी यहां अपने पास रखी पुरानी पटरियों को ही लाइन पर बिछा दिया है। पुरानी पटरियों पर पहले मालगाड़ियों को दौड़ाया जाएगा। मालगाड़ियों से इस ट्रैक पर नई पटरियों को लाने का काम होगा। इसके बाद एक-एक कर नई पटरियों को पुरानी की जगह लगाया जाएगा।

मालूम हो कि मथुरा-झांसी-बीना के बीच तीसरी रेल लाइन बनने के बाद ट्रेनों की गति बढ़ेगी। सफर का समय बचेगा और ट्रेनों की लेटलतीफी पर अंकुश लगेगा। इसके बाद कुछ और नई ट्रेनों को भी चलाने का रास्ता साफ हो जाएगा।

'बसई से बबीना तक तीसरी रेल लाइन का काम लगभग पूरा कर लिया गया है। यार्ड को जोड़ने का काम बाकी रह गया है, जो कि मार्च तक पूरा हो जाएगा। दूसरे चरण में झांसी से बबीना के बीच काम होना है। इसमें भी जमीन को समतल कर मिट्टी डालने और कई पुल बनना शुरू हो गए है। दूसरा चरण भी एक साल में पूरा हो जाएगा। इसके बाद झांसी से बसई तक के तीसरी लाइन के हिस्से में गाड़ियां दौड़ना शुरू हो जाएंगी।'
- संजय कुमार नेगी, अपर मंडल रेल प्रबंधक।

दीवार नहीं सीमेंट के फंसाए जा रहे सांचे
तीसरी रेल लाइन से सटकर जो प्लेटफार्म की दीवार बनाई जा रही है, वह ईंट की जगह सीमेंट के सांचों की तैयार हो रही है। अगर कभी प्लेटफार्म को पीछे खिसकना पड़े तो ऐसे में दीवार को नहीं तोड़ना होगा। सीधे सीमेंट के सांचे निकालकर प्लेटफार्म को पीछे खिसकाया जा सकता है।
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13 मीटर की होती है एक पटरी


एक रेल पटरी अधिकतम 13 मीटर की होती है। प्रत्येक मीटर का वजन 60 किलोग्राम होता है। एक पटरी को दूसरी पटरी से वेल्डिंग कर इस तरह जोड़ा जाता है कि बीच में कोई दरार नहीं रहे। और न ही इस बात का पता लगा है कि दो पटरियां आपस में जुड़ी हैं।  

यह भी जानिए
अगस्त 2016 में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी (सीसीईए) ने मथुरा से झांसी के बीच 273.80 किलोमीटर और झांसी से बीना के बीच 152.57 किलोमीटर की तीसरी रेल लाइन को मंजूरी दी थी। तीसरी नई रेल लाइन बिछाने में मथुरा-झांसी के बीच 4,377 करोड़ और झांसी-बीना के मध्य 24,90 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसमें रेल विकास निगम लिमिटेड मथुरा से झांसी के बीच, झांसी से ललितपुर के बीच रेलवे का निर्माण संगठन और ललितपुर और बीना के बीच इंजीनियरिंग विभाग को नया ट्रैक डालना है।

17 साल में बढ़ीं 56 गाड़ियां
झांसी रेल मंडल की दो लाइनों पर लगातार यात्री, मालगाड़ियों की संख्या और संचालन बढ़ने से लोड बढ़ गया है। इस कारण आए दिन रेल ट्रैफिक बाधित हो जाता है। महत्वपूर्ण ट्रेनों को रास्ता देने के लिए कुछ ट्रेनों की गति कम करनी पड़ती है या फिर उन्हें रोकना पड़ता है। पिछले 17 साल के भीतर झांसी रेल मंडल से गुजरने वाली गाड़ियों की संख्या 56 बढ़ गई हैं। इस हिसाब से 46 प्रतिशत गाड़ियों में इजाफा हुआ है। वर्तमान में झांसी-बीना बाइस प्रतिशत और आगरा-झांसी सेक्शन में बारह फीसदी ओवर ट्रैफिक है। अब तीसरी लाइन बिछने के बाद समस्या का समाधान किसी हद तक हो जाएगा।
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