अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में चल रहे राष्ट्रीय पुस्तक मेला के तहत अंतरराष्ट्रीय सृजनात्मक लेखन कार्यशाला के समापन पर कथाकार महेश कटारे ने अपनी कहानी के जरिये युवाओं को लेखन की बारीकियां समझाईं। कहा कि आप जो समाज में देखें, उसे ही अपनी कहानी में बयां करेंगे तो पाठक भी जुड़ेंगे। हर बार कुछ नया लिखने का जरूर प्रयास करें।
दिल्ली विश्वविद्यालय से आए गोपेश्वर दत्त पांडेय ने कहा कि भारतीय विचार और भारतीय परंपरा को अपने लेखन में जरूर शामिल करें। डॉ. विनोद द्विवेदी ने कहा कि पुस्तकों से लोगों का जुड़ना बेहद जरूरी है। पाठकों के साथ-साथ लेखकों को भी पुस्तकों के साथ न्याय करने की जरूरत है। हम पढ़ते कम हैं, लिखते ज्यादा है। उमेश सिंह ने कहा कि अगर आप लिखना चाहते हैं तो अपने लेख को खुद से, समाज, परिवार से जोड़कर देखने जरूरत है। सभी साहित्यकारों का सम्मान कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय, कुलसचिव विनय कुमार सिंह तथा क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी सुशील बाबू ने किया। इस दौरान प्रो. मुन्ना तिवारी, डॉ. बिपिन प्रसाद, डॉ. नवीनचंद्र पटेल, डॉ. अचला पांडेय, डॉ. श्रीहरि त्रिपाठी, डॉ. प्रेमलता श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।व