सूती मिल में बनेगी आवासीय कॉलोनी
झांसी। 22 साल से बंद पड़ी सूती मिल में झांसी विकास प्राधिकरण आवासीय कॉलोनी विकसित करेगा। इसकी तैयारियां शुरू कर दी गईं हैं। शनिवार को जिलाधिकारी व जेडीए उपाध्यक्ष ने उत्तर प्रदेश राज्य वस्त्र निगम के अफसरों के साथ मिल की जमीन का निरीक्षण किया। ये जमीन उत्तर प्रदेश वस्त्र निगम से जेडीए खरीदेगा। इसके बाद यहां कॉलोनी विकसित की जाएगी।
शहर के नजदीक झांसी-ग्वालियर मार्ग पर उत्तर प्रदेश राज्य वस्त्र निगम ने सन् 1977 में कताई मिल शुरू की थी, जिसे बाद में सूती मिल के नाम से जाना जाने लगा था। किसी जमाने में यहां बनने वाले धागे की पूरे देश में धमक थी लेकिन लगातार घाटे के चलते 1997 में इसको पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। कई प्रयासों के बाद यह दोबारा शुरू नहीं हो सकी थी। समय बीतने के साथ-साथ मिल की मशीनें कबाड़ में तब्दील हो गईं और भवन खंडहर व जर्जर हालत में हो गए थे। हालांकि, बीच में कई बार मिल को दोबारा चालू करने की मांगें उठती रहीं परंतु ताले नहीं खुल सके थे। अब नई योजना के अनुसार मिल के 79.69 एकड़ के विस्तृत परिसर में से झांसी विकास प्राधिकरण शुरुआत में लगभग 20 एकड़ जमीन खरीदकर कॉलोनी विकसित करेगा। अच्छी लोकेशन पर स्थित इस मिल की जमीन पर अभी उत्तर प्रदेश वस्त्र निगम का मालिकाना हक है। आवासीय कालोनी बनाने के लिए जेडीए ये जमीन वस्त्र निगम से खरीदेगा। जेडीए द्वारा इस जमीन पर आधुनिक संसाधनों से युक्त सुव्यवस्थित आवासीय कालोनी को विकसित किया जाएगा। कालोनी में स्कूल, अस्पताल, पार्क, व्यावसायिक भवन आदि भी बनाए जाएंगे। आर्मी का एयरबेस नजदीक होने के चलते मल्टी स्टोरी बिल्डिंग का निर्माण नहीं होगा। शनिवार को जिलाधिकारी शिव सहाय अवस्थी, जेडीए उपाध्यक्ष सर्वेश कुमार दीक्षित ने वस्त्र निगम के प्रभारी वित्त दीपक श्रीवास्तव व उनकी टीम के साथ मिल का निरीक्षण किया।
सालों से बंद पड़ी सूती मिल की जमीन को खरीदकर आवासीय कॉलोनी के निर्माण की योजना का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। जमीन का निरीक्षण किया गया है। जमीन को खरीदने के बाद आवासीय कॉलोनी का निर्माण होगा। जो स्थानीय लोगों के लिए काफी लाभकारी होगा।
- सर्वेश कुमार दीक्षित, उपाध्यक्ष जेडीए
साढ़े तीन हजार कर्मचारी हुए थे बेरोजगार
सूती मिल में वैसे तो साढ़े चार हजार से अधिक कर्मचारी काम करते थे लेकिन बंदी की सुगबुगाहट के साथ ही कई कर्मचारी पहले ही काम छोड़कर चले गए थे, जिस समय मिल को बंद किया गया था, उस समय यहां साढ़े तीन हजार कर्मचारी कार्यरत थे, जो बेरोजगार हो गए थे।