झांसी। निकाय चुनावों 15 जुलाई से पहले होंगे। शनिवार को राज्य निर्वाचन आयुक्त सतीश कुमार अग्रवाल ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए निर्देश दिया कि इसके लिए तैयारी में जुट जाएं। पिछड़ी जातियों के रैपिड सर्वे और वार्डों के आरक्षण और परिसीमन का काम 25 मई तक पूरा कर लिया जाए।
सतीश कुमार अग्रवाल ने यह भी निर्देश दिए कि चुनाव के लिए जो भी सामान खरीदा जाए, उसका टेंडर निकाला जाए। साथ ही जिला प्रशासन से फोटोकॉपी मशीन, 05 मेगा पिक्सल के कैमरे और स्कैनर की जानकारी भी मांगी है। जिलाधिकारी अजय कुमार शुक्ला ने बताया कि झांसी में नगर निगम के अलावा पांच नगर पालिकाएं और सात नगर पंचायतें हैं। रैपिड सर्वे के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। परिसीमन का काम 12 अप्रैल तक पूर्ण कर लिया जाएगा।
229 कार्यालयों से कर्मचारियों की सूची मांगी गई है। इसमें से 82 विभागों के कर्मचारियों की ऑनलाइन फीडिंग (इलेक्शन स्टाफ डिप्लायमेंट साफ्टवेयर) में हो गई है। शेष 156 विभागों के कर्मचारियों की फीडिंग का काम चल रहा है। वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान अपर जिलाधिकारी रमाशंकर गुप्ता, नगर आयुक्त अरुण प्रकाश, अपर नगर आयुक्त रोहन सिंह, तकनीकी निदेशक दीपक सक्सेना, अधिशासी अधिकारी (मऊरानीपुर, मोंठ और गुरसराय) भी उपस्थित रहे।
पिछड़ों की संख्या बताएं
प्रमुख सचिव (नगर विकास) ने निर्देश दिया है कि नगर निगम, नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों में पिछड़े वर्ग के लोगों की संख्या 27 अप्रैल तक स्थानीय निकाय निदेशक को भेज दें, ताकि वार्डों के आरक्षण का काम पूरा किए जा सके।
15 जुलाई को हुई थी पहली बैठक
2012 में निकाय चुनाव प्रक्रिया 25 मई से 02 जुलाई के बीच पूरी हुई थी। नगर निकायों की पहली बैठक 15 जुलाई 2012 को हुई थी। इस हिसाब से 15 जुलाई से पहले सामान्य निर्वाचन के कार्यों को पूरा करते हुए उनका गठन किया जाना है। ऐसा किया जाना तभी संभव है, जब नगर निकाय के वार्डों का परिसीमन पिछड़ी जातियों की संख्या के आधार पर रैपिड सर्वे तथा वार्डों के आरक्षण का कार्य हर हाल में 25 मई तक पूरा कर लिया जाए।
यह है बड़ी समस्या
नगर निकाय चुनाव 2011 की जनगणना के आधार पर कराए जाने की बात कही जा रही है। लेकिन इसका ब्योरा जारी नहीं किया गया है। अब जनगणना का डाटा खोजा जा रहा है। इसमें सबसे बड़ी दिक्कत ब्लाक बनाने की आ रही है, क्योंकि एक ब्लाक में 150 घर से ज्यादा नहीं रखे जा सकते हैं। जनगणना का कोई ब्योरा नहीं होने के कारण पिछड़ा वर्ग की आबादी छांटने की समस्या आ रही है। 2011 की जनगणना के अनुसार अन्य पिछड़ा वर्ग व अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों की आबादी किस वार्ड में कितनी है, इसको लेकर विभाग में माथापच्ची चल रही है।