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बिजली चोरों के लिए अलग से पुलिस थाना

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बिजली चोरों के लिए अलग से पुलिस थाना
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झांसी। महानगर के सीपरी बाजार सबस्टेशन के बगल के भवन में बिजली थाना खुल गया है। इस थाने में बिजली चोरी से संबंधित मामलों के लिए अलग से पुलिस की तैनाती कर दी गई है। थाने के खुलने से अब बिजली चोरी के मामलों का जल्द निपटारा भी हो सकेगा। हालांकि, बिजली थाने में अभी ऑपरेटर न होने कारण ऑनलाइन रिपोर्ट लिखने का काम नहीं हो पा रहा है।
अभी तक किसी भी तरह की चोरी पकड़ने पर पहले पुलिस थानों में रिपोर्ट दर्ज कराई जाती थी। इसके बाद अगर संबंधित व्यक्ति को पुलिस कार्रवाई से बचना है तो वह विभाग में जाकर शमन शुल्क और राजस्व निर्धारण एक साथ जमा करता था। इसके बाद विभाग राजस्व जमा होने का एक पत्र लिखकर देता था, जिसके आधार पर ही पुलिस कार्रवाई से बचा जा सकता था। खासकर सीधे चोरी में लगने वाली धारा 135 में लोग ज्यादा परेशान होते थे। ऐसे मामलों में पुलिस भी लोगों को परेशान करने से नहीं चूकती थी। पुलिस लोगों में डर बनाती थी कि शमन शुल्क जमा करने से कुछ नहीं होता है। मामला अब न्यायालय में ही निपटेगा। साथ ही कई मामलों में विभाग के अधिकारियों को भी रिपोर्ट लिखाने के लिए चक्कर लगाने पड़ते थे।
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इन्हीं सब समस्याओं को दूर करने के लिए सीपरी बाजार खालसा सबस्टेशन के बगल में खाली पड़े विभाग के भवन में विद्युत चोरी निरोधक पुलिस थाना दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड का कार्यालय खोल दिया गया है। इस थाने में पूरे जनपद के बिजली से जुड़े मामलों की रिपोर्ट और विवेचना होगी। थाने में एक प्रभारी निरीक्षक, पांच उपनिरीक्षक, चार हेड कांस्टेबल, चार कांस्टेबल व एक ऑपरेटर की होगी। इसमें अभी एक उपनिरीक्षक व दो कांस्टेबल आ गए हैं। थाने में अभी ऑपरेटर न होने कारण ऑनलाइन रिपोर्ट लिखने का काम नहीं हो पा रहा है।
विभाग के लिए अब रिपोर्ट लिखाना आसान हो जाएगा। रिकॉर्ड एक जगह उपलब्ध रहेगा। साथ ही जिन उपभोक्ताओं के शमन शुल्क जमा हो जाएंगे, उनको खत्म करने के लिए लोगों को लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा।
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- आरपीएस तोमर, मुख्य अभियंता (वितरण)।
ज्यादातर ऐसे आते हैं मामले
- बिना कनेक्शन घर मेें कटिया डालकर बिजली चोरी
- बकाये पर कनेक्शन कटने के बाद फिर जोड़ लेना
- मीटर के पहले कट लगाकर।
- मीटर में कारस्तानी कर।
- चोरी की बिजली से सिंचाई की मोटर चलाना।
- घरेलू बिजली कनेक्शन व्यावसायिक इस्तेमाल।
ये है कानून
- बिजली चोरी करते पाए जाने पर अगर अब तय शमन शुल्क जमा नहीं करते हैं तो तीन माह से सात साल तक ही सजा हो सकती है।
- धारा 135 विद्युत अधिनियम: कटिया डालकर, घरेलू बिजली का व्यावसायिक इस्तेमाल।
- धारा 136 विद्युत अधिनियम: बिजली के सरकारी उपकरणों को नुकसान पहुंचाना।
- धारा 137 विद्युत अधिनियम: विद्युत चोरी का सामान बरामद होने पर।
- धारा 138 विद्युत अधिनियत: मीटर से छेड़छाड़, काटे गए कनेक्शन को फिर जोड़ना।
- धारा 139 विद्युत अधिनियम: बिजली की बर्बादी करने जैसे मामलों में।
- धारा 140 विद्युत अधिनियम: बिजली के तार और अन्य उपकरण चोरी के मामले।
दो- दो करोड़ रुपये बढ़ाया लक्ष्य
अभी शहर के तीनों वितरण खंडों का 12- 12 करोड़ लक्ष्य है। मगर, उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने इस लक्ष्य को दो- दो करोड़ रुपये और बढ़ा दिया है। इसके लिए अधिकारियों से अधिक से अधिक चेकिंग करने, बकायेदारों से बकाया वसूलने, कटे कनेक्शन के उपभोक्ताओं से वसूली करने पर जोर देने को कहा है।
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