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नगर निगम के गलियारों से नगर की गलियों तक पहुंची महापौर और उप सभापति की रार

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झांसी। नगर निगम में महापौर और उप सभापति के बीच जारी तनातनी लगातार बढ़ती जा रही है। दोनों के बीच चल रही इस रार की चर्चाएं नगर निगम के गलियारों से होती हुईं महानगर की गलियों तक पहुंच गईं हैं। चर्चा है कि उप सभापति नगर निगम में लिए जाने वाले फैसलों पर महापौर को घेरने का कोई भी मौका नहीं छोड़ते हैं। जबकि, महापौर किसी भी निर्णय में उप सभापति की राय लेना जरूरी नहीं समझते। ये स्थिति तब है जबकि दोनों ही भारतीय जनता पार्टी से हैं।
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नगर निगम में इन दिनों महापौर रामतीर्थ सिंघल और उप सभापति राजेश त्रिपाठी के बीच घमासान की स्थिति बनी हुई है। उप सभापति खुलकर महापौर के खिलाफ मैदान में उतरे हुए हैं। नगर की सजावट का मुद्दा हो या फिर स्ट्रीट लाइट, सड़क निर्माण का, हर मोर्चे पर उप सभापति महापौर को घेरते हुए नजर आते हैं। नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार का मुद्दा वे लगातार उठाते रहते हैं और इसकी स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों से लेकर शासन तक से शिकायत करने से नहीं चूकते। ऐसे में अक्सर असहज स्थिति पैदा हो जाती है। क्योंकि, महापौर और उप सभापति दोनों ही भाजपा से हैं। राजेश त्रिपाठी द्वारा उप सभापति का पद संभालने के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि दोनों में समन्वय बना रहेगा। लेकिन, ठीक इसके उलटा हो रहा है। महापौर पर एक और आरोप लगातार लगता आ रहा है कि वे नगर निगम में लिए जाने वाले फैसलों में उप सभापति को लगातार नजरअंदाज करते आ रहे हैं। उप सभापति की रायशुमारी भी जरूरी नहीं समझी जाती है। पार्टी फोरम पर भी ये मसला कई बार उठ चुका है। पार्टी के कुछ नेताओं में दोनों को एक राय करने की कोशिशें भी कीं, लेकिन सभी सिफर साबित हुईं हैं।
राजेश को उप सभापति बनाने का बीड़ा सबसे पहले मैंने ही उठाया था और उन्हें इस पद पर पहुंचाया। वाजिब मुद्दों पर अपनी आवाज मुखर करना अच्छी बात है। लेकिन, हर मुद्दे पर नगर निगम को घेरना ठीक नहीं है। हालांकि, मेरे मन में राजेश के प्रति कोई राग, द्वेष नहीं है।
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- रामतीर्थ सिंघल, महापौर
नगर निगम में भ्रष्टाचार गहरी जड़ें जमाए हुए है। इसके खिलाफ हम मुद्दों की लड़ाई लड़ रहे हैं, किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है। यदि महापौर इसे अपने ऊपर लेते हैं, तो ये उनकी सोच है। मेरा इरादा महापौर को ठेस पहुंचाने का कतई नहीं है।
- राजेश त्रिपाठी, उप सभापति - नगर निगम
महापौर और उप सभापति के बीच कोई व्यक्तिगत द्वेष नहीं है और न ही दोनों में से किसी को इसे व्यक्तिगत लेना चाहिए। मुद्दों की लड़ाई लड़ना अच्छी बात है, ये जनता की बेहतरी के लिए ही है। इसके अलावा पार्टी के लोग दोनों के बीच आपसी समन्वय बनाने का पूरा प्रयास कर रहे हैं।
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- मुकेश मिश्रा, महानगर अध्यक्ष - भाजपा
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