झांसी। हाउसटैक्स में गड़बड़झाला खत्म करने को नगर निगम महानगर के सभी 1.40 लाख भवनों की यूनिक आईडी तैयार करा रहा है। इस संबंध में निगम प्रशासन ने कवायद भी शुरू कर दी है। इससे न सिर्फ रिहायशी एवं व्यावसायिक भवनों की अलग पहचान हो सकेगी बल्कि भवन स्वामी अपने मकान पर लगे हाउसटैक्स की सटीक जानकारी हासिल कर सकेंगे। निगम अफसर भी प्रत्येक भवन पर लगे टैक्स की ऑनलाइन निगरानी रख सकेंगे। निगम अफसरों का दावा है कि इससे टैक्स में होेने वाली गड़बड़ी खत्म हो जाएगी।
नगर निगम सीमा में कुल 1.40 लाख भवन हैं लेकिन, अभी सिर्फ 1.20 लाख भवनों से ही नगर निगम को टैक्स मिलता है। जिन भवनों से टैक्स मिलता है, उनमें भी अधिकांश सांठगांठ करके काफी कम टैक्स देते हैं। सरकारी खजाने को हर साल इससे मोटी चपत सहनी पड़ती है। इसको रोकने के लिए शासन जीआईएस सर्वे करा रहा है। सर्वे के साथ भवनों की यूनिक आईडी भी तैयार कराई जा रही है। निगम अफसरों के मुताबिक इस 17 अंकों के कोड में राज्य से लेकर मोहल्ले तक की सारी जानकारी छिपी होगी। आखिरी अंक में मकान की श्रेणी संबंधी जानकारी रहेगी। इसी से भवन के टैक्स की सटीक जानकारी हो सकेगी। गड़बड़ी करने वालों को आसानी से पकड़ा जा सकेगा।
अलग से हो सकेगी रिहायशी एवं व्यवसायिक भवनों की पहचान
इसकी मदद से रिहायशी एवं व्यावसायिक भवन अलग से पहचाने जा सकेंगे। अभी भवन नंबर आवंटित होते हैं लेकिन, इससे रिहायशी एवं व्यावसायिक भवन की पहचान नहीं हो पाती। अब इन नए यूनिक आईडी से भवनों की पहचान सिर्फ इसके माध्यम से ही हो सकेगी।
एल्युमिनियम की होगी नंबर प्लेट
प्रत्येक भवन को एल्युमिनियम की 150 मिमी लंबाई की नंबर प्लेट दी जाएगी। यह 80 एमएम चौड़ाई एवं 01 मिमी मोटी साइज की नंबर प्लेट होगी। क्यूआर कोड एवं आरएफआई टैग भी इसमें लगा रहेगा। इसके माध्यम से स्कैन करके भवन स्वामी अपने मकान की सारी जानकारी हासिल कर सकेगा।
सभी साठ वार्डों में यह काम कराया जा रहा है। इसके माध्यम से प्रत्येक भवन को जीआईएस बेस मैप से जोड़ा जाएगा। 17 अंकों की यह यूनिक आईडी से टैक्स व्यवस्था में काफी सुधार होगा।
पुलकित गर्ग, नगर आयुक्त