झांसी। देश के ऐतिहासिक मंदिरों में से एक है लक्ष्मी तालाब स्थित महा लक्ष्मी जी का मंदिर। प्रत्येक शुक्रवार को महारानी लक्ष्मीबाई मंदिर में महालक्ष्मी के दर्शन के लिए आती थीं। एक वक्त ऐसा भी आया, जब इस मंदिर का संपूर्ण प्रबंधन रानी लक्ष्मीबाई ने ही संभाला था। इस मंदिर की संपत्ति अंग्रेजों द्वारा अधिग्रहण करने पर झांसी की जनता भड़क गई थी। आज भी इस मंदिर में प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। दीपावली पर दीप प्रज्ज्वलित कर माता का आशीष प्राप्त करते हैं।
महालक्ष्मी मंदिर को लेकर कई मान्यता हैं कि यहां महालक्ष्मी जी की मूर्ति स्थापना के लिए कोल्हापुर से तांत्रिक आचार्य एवं विद्वान आए थे। मंदिर का निर्माण 17 वीं सदी में झांसी के मराठा शासकों द्वारा किया गया था। राजसी मंदिर होने के कारण इसे भव्यता प्रदान की गई। मंदिर में राजा गंगाधर राव एवं रानी लक्ष्मीबाई के विवाह की रस्में भी हुई थीं। वर्तमान में यह मंदिर राज्य पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है। क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. एसके दुबे के अनुसार मंदिर परिसर में मां लक्ष्मी की मूर्ति के ठीक सामने दीप स्तंभ है, जिसके आले में दीप प्रज्ज्वलित किया जाता है। दीपावली एवं पितृ पक्ष की महालक्ष्मी अष्टमी को भव्य पूजा एवं धार्मिक कार्यक्रम में दूर - दूर से श्रद्धालु शामिल होते हैं।
महालक्ष्मी मंदिर झांसी के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है। महानगर के कई परिवार मंदिर में महा लक्ष्मी के दर्शन के उपरांत की कार्य शुरू करते हैं।
सोनिया नायक निवासी बड़ागांव गेट बाहर
महालक्ष्मी मंदिर पर झांसी के वासियों की असीम आस्था रही है। यह मंदिर ऐतिहासिक है और देश - विदेश से श्रद्धालु दर्शन को आते हैं।
मोहित राय निवासी अन्नपूर्णा कालोनी
हम सभी त्योहारों पर मंदिर में महालक्ष्मी के दर्शन के लिए परिवार सहित आते हैं। दीपावली पर भी दीप प्रज्ज्वलित कर मां से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
दीपिका देवलिया निवासी खंडेराव गेट
कभी मंदिर के चारों ओर कमल के फूल खिलते थे। मंदिर से जुड़ी कई मान्यतायें हैं। झांसी के लोगों पर मां महालक्ष्मी की हमेशा कृपा रही है।
भावना चौरसिया निवासी टंडन रोड