दीपों से जगमग हुआ महालक्ष्मी मंदिर
झांसी। महानगर के प्राचीन महा लक्ष्मी मंदिर में दीपोत्सव की परंपरा दशकों बाद एक बार फिर भव्य रूप में नजर आई। दीपावली पर समाजसेवी संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से पुरातत्व विभाग के सहयोग से दीपदान कर मंदिर परिसर को सजाया। दीप स्तंभ पर भी दीप प्रज्ज्वलित किए। इस मौके पर सभी ने संकल्प लिया कि आगामी दीपावली मंदिर में और भी भव्य तरीके से मनाई जाएगी।
लक्ष्मी तालाब के तट पर मराठा सूबेदार रघुनाथ राव द्वितीय ने 17 वीं शताब्दी में मां महालक्ष्मी के मंदिर का निर्माण कराया था। इसके बाद राजा गंगाधर राव और महारानी लक्ष्मीबाई का इस मंदिर के प्रति विशेष लगाव रहा। दीपावली पर दीपोत्सव का भव्य आयोजन होता था। लेकिन 1857 - 58 की क्रांति के बाद इस मंदिर में धीरे-धीरे दीपोत्सव की परंपरा लुप्त होने की कगार पर पहुंच गई। अमर उजाला द्वारा खबर प्रकाशन के बाद समाजसेवी संस्थाओं ने पुरातत्व विभाग के सहयोग से भव्य दीपोत्सव का निर्णय लिया।
रविवार को शाम होते ही क्षत्रिय कलचुरी कलवार महासंघ, युवा शक्ति संगठन के अध्यक्ष अजीत राय, संजीव शर्मा, रामकुमार शिवहरे, अंकित राय ने, बुंदेलखंड साहित्य संगीत कला संस्थान के अध्यक्ष रवीश त्रिपाठी, राजकुमार अमरया ने, टंडन रोड व्यापार मंडल सीपरी के अध्यक्ष पंकज शुक्ला ने, सभासद प्रदीप नगरिया, आमोद दीक्षित, पवन तिवारी, भइयन गुप्ता, संजय चौरसिया, सुदर्शन शिवहरे आदि ने दीपों को प्रज्ज्वलित किया और रंगोलियां भी बनवाईं। इस मौके पर महालक्ष्मी की पूजा अर्चना भी की। दीप प्रज्ज्वलन के बाद लोगों ने पलों को यादगार बनाने के लिए अपने अपने मोबाइल से सेल्फी भी ली।