राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की 131वीं जयंती पर बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, हिंदी विभाग और अखिल भारतीय साहित्य परिषद की तरफ से तीन अगस्त से दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। संगोष्ठी में बुंदेली भाषा पर साहित्यिक चर्चा भी होगी।
मंगलवार को हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. मुन्ना तिवारी ने पत्रकार वार्ता के दौरान बताया कि बृहस्पतिवार को राष्ट्रकवि के जन्म दिवस पर उनके साहित्य अवदान पर चर्चा करने के लिए देश के विद्वान ‘भारत की राष्ट्रीय चेतना और राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त’ विषय पर विचार रखेंगे। शुक्रवार को बुंदेली भाषा पर साहित्यिक चर्चा होगी और लोक साहित्य के विद्वान ‘लोकभाषा बुंदेली: वर्तमान दशा और नई संभावनाएं’ विषय पर चर्चा करेंगे। आयोजन सचिव डॉ. पुनीत बिसारिया ने बताया कि संगोष्ठी में हिस्सा लेने के लिए देश के कई विख्यात साहित्यकार शामिल होंगे। पहले दिन सुबह 11 बजे गांधी सभागार में मुख्य अतिथि वरिष्ठ चिंतक एवं विचारक श्रीधर गोविंद पराड़कर होंगे। उद्घाटन आगरा के केंद्रीय हिंदी संस्थान के निदेशक प्रो. नंदकिशोर पांडेय करेंगे। इस दौरान डॉ. अचला पांडेय, डॉ. सुनील भटनागर, देवेश श्रीवास्तव, आशीष तिवारी मौजूद रहे।
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कवि सम्मेलन, सम्मान समारोह भी
अखिल भारतीय कवि सम्मेलन और साहित्य सम्मान समारोह का आयोजन तीन अगस्त को रात आठ बजे से गांधी ऑडिटोरियम में होगा। इसमें देश के प्रख्यात गीतकार डॉ. विष्णु सक्सेना, डॉ. कलीम कैसर, सर्वेश अस्थाना, डॉ. सुमन दुबे, राशि पटैरिया, डॉ. अवध किशोर जडिया, अभिराम पाठक शामिल होंगे। समारोह के मुख्य संयोजक डॉ. वैभव गुप्ता ने बताया कि कवि सम्मेलन के पहले हिंदी साहित्य के विद्वान डॉ. कन्हैया सिंह को राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त साहित्य सम्मान दिया जाएगा। इसमें 21 हजार रुपये की राशि शामिल है।