झांसी। मदर टेरेसा का झांसी से गहरा नाता रहा है। देश में उन्होंने अपने चौथे आश्रम की स्थापना झांसी में की थी, जो पचपन सालों से बेसहारों का सहारा बना हुआ है। वह यहां कई बार आईं। मंगलवार को उन्हें संत की उपाधि मिलने जा रही हैं। ऐसे में झांसी से जुड़ीं उनकी यादें एक बार फिर ताजा हो गई हैं।
गरीब, असहायों की सेवा के लिए मदर टेरेसा ने सन 1950 में मिशनरीज ऑफ चैरिटी की स्थापना की थी। उन्होंने कलकत्ता, रांची और दिल्ली में आश्रमों की स्थापना की थी। उनका चौथा पड़ाव झांसी था। यहां वह पहली बार 18 जनवरी 1961 को आईं थीं। कलकत्ता से झांसी से तक ट्रेन से पहुंची थीं। जबकि, झांसी के अंदर का सफर उन्होंने बैलगाड़ी में बैठकर पूरा किया था। यहां उन्होंने मिशनरीज ऑफ चैरिटी के द्वारा नई बस्ती क्षेत्र में एक किराये के भवन में स्लम स्कूल और डिस्पेंसरी शुरू कराई थी तथा सिविल लाइन क्षेत्र में अनाथ बच्चों व बेसहारा महिलाओं के लिए आश्रम की स्थापना की थी।
इसके बाद मदर टेरेसा का कई बार झांसी आना जाना हुआ। वर्तमान में यह आश्रम इलाइट के पीछे मनु विहार कालोनी में स्थिति है। मदर टेरेसा के निधन के बाद इसका नाम मदर टेरेसा आश्रम कर दिया था। इस समय आश्रम में सौ लोगों को सहारा मिला हुआ है। इनमें कुछ महीनों के बच्चों से लेकर निराश्रित महिलाएं तक शामिल हैं। आश्रम का संचालन लोगों से मिलने वाले दान से किया जाता है। इसके अलावा ललितपुर के पनारी में भी मिशनरीज ऑफ चैरिटी एक आश्रम संचालित कर रही है।
आश्रम में खुशी का आलम
आश्रम की स्थापना के लिए मदर टेरेसा पहली बार झांसी आईं थीं। आखिरी बार वह 1986 में यहां आईं थीं। लेकिन, इसकी ठीक तारीख पता नहीं है। आश्रम का संचालन अब भी मदर टेरेसा की सोच के अनुरूप ही किया जा रहा है। उनको संत की उपाधि मिलने से आश्रम में रहने वालों में खुशी का आलम है।
- सिस्टर लियोंस, आश्रम इंचार्ज