झांसी। बंगाली समाज की काली बाड़ियों में इस बार शारदीय नवरात्र पर मां दुर्गा की मूर्तियां विराजमान नहीं होंगी। इस साल घट स्थापना कर पूजन किया जाएगा। इनका विसर्जन भी काली बाड़ी परिसरों में बने कुंड में होगा। महानगर की काली बाड़ी समितियों का कहना है कि कोरोना वायरस से बचाव के यह निर्णय लिया गया है। सरकार की गाइड लाइन के अनुसार कार्य होगा।
महानगर में शहर फूटा चौपड़ा स्थित काली बाड़ी एवं सीपरी कारगिल पार्क के समीप कालीबाड़ी में शारदीय नवरात्र पर बंगाली समाज धार्मिक विधिविधान के साथ मां दुर्गा की मूर्तियां विराजमान करता है। शहर में इस साल 160 वां और सीपरी में 60 वां दुर्गा उत्सव का आयोजन होगा। सीपरी कालीबाड़ी समिति के सचिव प्रियांशु डे ने बताया कि कालीबाड़ी में घट (कलश) स्थापना होगी। मां दुर्गा की मूर्तियां विराजमान नहीं होंगी और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी नहीं होंगे। काली बाड़ी में जो भी पूजन के लिए आएगा। वह चार - चार फीट की दूरी पर रहेगा। इसके लिए खंड बनाए गए हैं। सीपरी में बंगाली समाज छठ से पूजन शुरू करेगा। इधर, शहर काली बाड़ी में बांधव समिति वैदिक रीति से घट स्थापना कर पूजन करेगी। समिति के महासचिव अजीत राय एवं सांस्कृतिक सचिव रवि शंकर चटर्जी ने बताया कि पूजा में सिर्फ बांधव समिति के ही सदस्य रहेंगे। घट स्थापना में पांच कलश रखे जाएंगे, जो मां दुर्गा, सरस्वती, लक्ष्मी, गणेश एवं कार्तिकेय के प्रतिनिधि के रूप में स्थापित किए जाएंगे।
वर्ष 1861 में भी हुई भी घट स्थापना कर पूजा
शहर काली बाड़ी में इस साल दुर्गा उत्सव के आयोजन का 160 वां वर्ष है। सांस्कृतिक सचिव रवि शंकर चटर्जी के अनुसार शहर काली बाड़ी में दुर्गा उत्सव 1861 में शुरू हुआ था। तब भी मूर्ति विराजमान नहीं की गई थी। घट स्थापित कर पूजा अर्चना की गई थी। इसके बाद इस वर्ष भी मां दुर्गा की मूर्ति विराजमान नहीं होगी।