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बिलखती माताएं पूछ रही थीं ... बताओ बेटा अब कौन बनेगा राम... कौन बनेगा लक्ष्मण

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झांसी। मां हम सब भाई बहन दशहरा पर घर पर ही रावण को मारेंगे। मैं राम बनूंगा नरेंद्र लक्ष्मण...। पापा, दीपावली पर हमारे लिए नए कपड़े जरूर लाना। खूब मस्ती करेंगे। तालबेहट के झावर गांव में चार बच्चों को खो देने वाले प्रजापति परिवार की महिलाएं उनकी मासूम बातों को याद कर गश खाकर गिर रहीं थीं। पूरा गांव स्तब्ध था, जो घर बच्चों की अठखेलियों से खिलखिलाता रहता था। उसमें परिवार वालों का विलाप गूंज रहा था। बच्चों की माताएं दुहाई दे रही थीं की उनकी गोद क्यों सूनी हो गई।
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किसी को भी झकझोर देने वाला नजारा था। गांव वालों की आंखें नम थीं। सभी मृत बच्चों के माता-पिता को संभालने का प्रयास कर रहे थे। बिलखती माताओं की हालत देख गांव के बुजुर्ग रोते हुए वहां से हट जा रहे थे। किसी के घर में चूल्हा नहीं जला। सभी चारों बच्चों की मीठी बातों को याद कर रहे थे। चर्चा कर रहे थे कि सुबह ही तो बच्चे राम-रावण युद्ध की बात कर रहे थे। कोई कह रहा था सभी बच्चों में राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघभन जैसा प्यार था। पूरे गांव का दिल मोह लिया था इन बच्चों ने।
दिन भर उछलते, कूदते इन चारों बच्चों के शव एक साथ देख लोगों का कलेजा कांप रहा था। महिलाएं यह नजारा देखने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थीं। सभी कह रहीं थीं, हे भगवान फूल से इन मासूम बच्चों की जगह हमको क्यों नहीं उठा लिया। इन्होंने किसी का क्या बिगाड़ा था...। इसके साथ ही वे दहाड़ें मार कर रो रही थीं। परिवार का कोई सदस्य अपनी छाती पीट रहा था कोई अपना सर दीवार में मार रहा था। माताएं पूछ रही थीं.... बताओ बेटा अब कौन बनेगा राम... कौन बनेगा लक्ष्मण।
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