झांसी। शुक्रवार को ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण पडे़गा। लेकिन यह उपछाया ग्रहण होगा। ऐसे में यम, नियम तथा सूतक आदि अमान्य रहेगा। धार्मिक दृष्टि से इस ग्रहण का कोई महत्व नहीं है। पूजन आदि बराबर जारी रहेंगे। इसे ज्योतिष में मांद्य चंद्रग्रहण भी कहते है। वहीं, 21 जून को सूर्य ग्रहण रहेगा और फिर 5 जुलाई को चंद्र ग्रहण होगा। ज्योतिष विद्वानों के अनुसार लगातार तीन ग्रहण का होना ठीक नहीं होता है। विश्व में मानवीय प्रतिद्वंद्विता बढ़ती है।
शुक्रवार को चंद्रग्रहण रात 11 बजे से शुरू होगा। जो मध्य रात 2 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। धार्मिक एवं ज्योतिषीय विद्वानों के अनुसार भारत में दिखाई देना वाला यह ग्रहण उपछाया चंद्र ग्रहण होगा। जिसकी वजह से सूतक मान्य नहीं है। महंत विष्णु दत्त स्वामी ने बताया कि चंद्रग्रहण का कोई धार्मिक महत्व नहीं है। पूजा कार्य बराबर जारी रहेगा। उनके अनुसार ग्रहण काल में गर्भवती महिलाएं घर से बाहर न निकले। वह सावधानी बरते। इधर ज्योतिषविद् डॉ. नाथूराम पांडेय ने बताया कि लगातार तीन ग्रहण पड़ने से मानवीय प्रतिद्वंद्विता के साथ ही विश्व में युद्ध की प्रबल संभावना है। इस प्रकार के ग्रहणों को लेकर कई पौराणिक कथाएं भी प्रचलित है।